हंसी के पीछे छिपी कहानी: असरानी की जिंदगी से जुड़े वो पल, जो बहुत कम लोग जानते हैं
मुंबई: असरानी बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडी कलाकार थे, जिन्होंने 50 साल से ज्यादा समय तक दर्शकों को हंसाया। 1 जनवरी 1941 को जयपुर में जन्मे असरानी ने करीब 350 फिल्मों में काम किया। उनकी मौत 20 अक्तूबर 2025 को हो गई, लेकिन उनके सेट पर हुए किस्से हमेशा याद किए जाएंगे।
हिटलर से मिली प्रेरणा
फिल्म 'शोले' (1975) के सेट पर असरानी को जेलर का छोटा सा रोल मिला। डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने कहा कि ये रोल अंग्रेजों के जमाने का होना चाहिए। असरानी ने खुद हिटलर के पुराने वीडियो देखे और उनका अंदाज कॉपी किया। चलने का तरीका, हाथ हिलाना और डायलॉग बोलना सब हिटलर जैसा। सेट पर सब हंस-हंसकर लोटपोट हो गए। उनका डायलॉग 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं' आज भी मशहूर है। असरानी ने कहा था कि ये रोल इतना छोटा था, लेकिन बॉडी लैंग्वेज ने इसे अमर बना दिया।
पत्नी से सेट पर पहली मुलाकात
असरानी की पत्नी मंजू से पहली मुलाकात 'आज की ताजा खबर' फिल्म के सेट पर हुई थी, जहां पहले उनकी दोस्ती हुई और फिर 'नमक हराम' के सेट पर उनकी मोहब्बत परवान चढ़ी। बाद में दोनों ने शादी कर ली। असरानी का एक बेटा है, जिनका नाम नवीन है।
जया बच्चन के साथ सेट पर हंसी का तूफान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बार फिल्म 'गुप्ता जी की भाभी' या इसी तरह की कोई शूटिंग के दौरान असरानी और जया बच्चन साथ थे। सीन में असरानी को जया पर गुस्सा दिखाना था, लेकिन दोनों इतना हंस पड़े कि 20 टेक लग गए। असरानी ने जया को चिढ़ाया और जया ने जवाब में उनका मजाक उड़ाया। डायरेक्टर को गुस्सा आ गया, लेकिन सेट पर माहौल खुशहाल हो गया। असरानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जया के साथ काम करना हमेशा मजेदार था, जैसे घर में बहन हो।
दोस्ती की मिसाल
असरानी ने राजेश खन्ना के साथ करीब 25 फिल्मों में काम किया है, जैसे 'आन मिलो सजना' और 'मेरा नाम जोकर'। सेट पर दोनों इतने करीबी थे कि राजेश खन्ना असरानी को अपना 'भाई' कहते। एक किस्सा है जब 'मेरा नाम जोकर' के सेट पर राजेश खन्ना बीमार पड़ गए। असरानी ने उनका ख्याल रखा, दवा दी और सीन शूट होने तक इंतजार किया। असरानी ने कहा था कि सेट पर दोस्ती ही असली कमाल करती है।

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