कार्बाइड गन विस्फोट में घायल बच्चों से मिलने पहुंचे राजेंद्र शुक्ल, बोले- हर संभव मदद मिलेगी
भोपाल। दिवाली के मौके पर देश में कार्बाइड गन बनाने और उसे बेचने का एक नया और खतरनाक ट्रेंड बन चुका है। इस देसी पटाखा और जुगाड़ वाली कार्बाइड गन से मध्य प्रदेश में अब तक 316 बच्चें घायल हो गए हैं। कार्बाइड गन का इस्तेमाल करने के बाद बच्चों की आंखों में जलन होने लगी जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हमीदिया अस्पताल में भर्ती बच्चों से आज डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मुलाकात कर उनका हाल जाना है।राजेंद्र शुक्ल ने गन निर्माण करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बच्चों का हाल जानने पहुंचे डिप्टी सीएम
आज डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल हमीदिया अस्पताल में कार्बाइड गन से घायल हुए बच्चों का हाल जानने पहुंचे हैं। उन्होंने घायल बच्चों से मुलाकात के बाद डॉक्टरों को निर्देश दिए कि सभी घायल बच्चों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि पूरे मामले पर निरंतर निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से पटाखा निर्माण एवं विस्फोटक सामग्री रखने वालों पर कार्रवाई जारी है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी पहुंचे अस्पताल
कार्बाइड गन से घायल हुए बच्चों का हाल जानने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी हमीदिया अस्पताल पहुंचे। सिंघार ने अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों के इलाज की व्यवस्था देखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि सही तरीके से मरीजों का इलाज होना चाहिए। जब तक इलाज चले, सरकार को पूरी जिम्मेदारी के साथ इलाज कराना चाहिए। मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाया है तो यह पटाखा गन कहां से आ गई। उन्होंने कहा कि कार्बाइड गन की वजह से बच्चों की आंखों की रोशनी जाते-जाते बची है। बड़ी संख्या में बच्चे प्रदेशभर में घायल हुए हैं. सिंघार ने कहा कि आखिर प्रशासन कहां था और पुलिस क्या कर रही थी। इसको लेकर सरकार को जवाब देना चाहिएउन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को निगरानी करनी चाहिए, वरना सरकार को उनका इस्तीफा लेकर उन्हें रीवा भेज देना चाहिए।
कार्बाइड गन पर लगा बैन
खतरनाक कार्बाइड गन पर भोपाल, ग्वालियर और विदिशा में बैन लगा दिया गया है. राजधानी भोपाल में इसके निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक व्यक्ति के अवैध पटाखा विक्रय के आरोप में बीएनएस की धारा 288 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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