मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के खाते में आने वाले हैं 1500, मोहन यादव ने फिक्स कर दी तारीख
भोपाल: मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों को इस माह मिलने वाली सौगात की सरकार ने तारीख तय कर दी है. इस बार से प्रदेश की सवा करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1250 रुपए के स्थान पर 1500 रुपए की राशि मिलने जा रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 नवंबर को सिवनी में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि जारी करेंगे. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लाड़ली बहना योजना की राशि में बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है.
लाड़ली बहना योजना की 30वीं किस्त
मध्य प्रदेश में 2023 में विधानसभा चुनाव के पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की इस माह 30वीं किस्त जारी होने जा रही है. इस किस्त में लाड़ली बहना के खातों में 1250 रुपए की राशि नहीं, बल्कि 250 रुपए बढ़कर आएंगे. इस तरह खातों में 1500 रुपए की राशि हर माह आएगी. राज्य सरकार ने भाई दूज से लाड़ली बहना योजना की राशि को बढ़ाकर 1500 रुपए कर दिया है. बढ़ी हुई राशि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 नवंबर को सिवनी से करीब 1800 करोड़ की राशि जारी करेंगे.
इससे प्रदेश की सवा करोड़ बहनों को सीधा लाभ पहुंचेगा. राशि में बढ़ोत्तरी के बाद राज्य सरकार पर हर साल 21 हजार करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकार को खर्च करनी होगी. इसके लिए वित्त विभाग बजट की व्यवस्था करने में जुटा है.
फिलहाल नहीं बढे़गी बहनों की संख्या
कैबिनेट में हुए निर्णय की जानकारी देते हुए एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप से जब लाड़ली बहना योजना में नए हितग्राहियों को जोड़ने को लेकर सवाल किया गया तो, उन्होंने कहा कि फिलहाल अभी सरकार का इस योजना में नए हितग्राहियों को लेकर कोई विचार नहीं हैं. भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है. सरकार का फोकस है कि प्रदेश की लाड़ली बहनें लखपति बनें. इसके लिए महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है. समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे प्रोडक्ट्स को सरकार प्रोत्साहित कर रही है. ताकि प्रदेश की महिलाएं सक्षम बनें.
योजना से बाहर हो चुकी 5 लाख बहनें
मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 में जब विधानसभा चुनाव के पहले यह योजना शुरू की थी. उसके बाद से अब तक इस योजना में करीबन 5 लाख हितग्राही बहनों की संख्या कम हो गई है. इस योजना के नियमों के मुताबिक 60 साल से अधिक की उम्र पार करने के साथ ही महिला का नाम योजना से हटा दिया जाता है. ऐसी महिलाओं को वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में रख लिया जाता है. यही वजह है कि योजना के तहत जब पहली किस्त जारी की गई थी, उस समय महिला हितग्राहियों की संख्या 1 करोड़ 31 लाख थी, जो अब घटकर 1 करोड़ 26 लाख महिलाएं रह गई है.

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