पवनपुत्र हनुमान और सुग्रीव से जुड़े हैं इस मंदिर के तार, यहीं बसा था किष्किंधा लेकिन पूजा-पाठ पूरी तरह से बंद
कर्नाटक में हम्पी में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसके हर पत्थर में रहस्य छिपा है. मंदिर की बनावट और स्तभों की वास्तुकला पर आस्था और विजयनगर शैली का गहरा प्रभाव दिखता है. मंदिर की दीवारों पर चीन और मिस्र की कला भी देखने को मिलती है. हम बात कर रहे हैं कर्नाटक के हम्पी के विजयनगर में बने श्री अच्युतराय स्वामी मंदिर की, जहां अब पूजा-पाठ नहीं होती है. इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और यहां देखने लायक कई चीजें मिलती हैं. यह मंदिर ना केवल ऐतिहासिक है बल्कि यह विशाल वास्तु शिल्प को भी दर्शाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
वास्तुकला शैली मंदिरों को बेहतरीन रूप
श्री अच्युतराय स्वामी मंदिर को अपने इतिहास और वास्तुकला के लिए जाना जाता है. मंदिर मातंग पहाड़ियों के बीच स्थित है, जहां आसपास की जनसंख्या बेहद कम है. यह शानदार मंदिर विजयनगर वास्तुकला शैली के मंदिरों को अपने सबसे अच्छे और सबसे बेहतरीन रूप में दिखाता है. यह उन आखिरी शानदार मंदिरों में से एक था, जो विजयनगर साम्राज्य के पतन से पहले हम्पी के प्रसिद्ध शहर में बनाए गए थे. बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण 1534 ईस्वी में हुआ था और बदलते समय के साथ आज मंदिर में अलग-अलग शताब्दी की झलक भी देखने को मिलती है.
स्तंभों पर सिर्फ हिंदू देवी-देवता
यह मंदिर अपने बड़े गोपुरम और विशाल परिसर के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर को कई स्तंभों के निर्माण के साथ बनाया गया है. स्तंभों पर सिर्फ हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां ही नहीं, बल्कि चीन और मिस्र के व्यापारियों के हम्पी आने के सबूत भी हैं. मंदिर के स्तंभों पर व्यापार के कुछ चिन्ह या कलाकृति बनी हैं. यह मंदिर भगवान विष्णु के तिरुवेंगलनाथ रूप को समर्पित है.मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं, लेकिन मूल देवता के रूप में काफी समय तक भगवान विष्णु को पूजा गया.
मंदिर में पूजा-पाठ भी बंद
आज यह मंदिर रखरखाव के अभाव में खंडहर बन चुका है और मंदिर में पूजा-पाठ भी बंद है. मंदिर को रामायण के पात्र सुग्रीव और बाली से जोड़कर देखा गया है. माना जाता है कि अपने भाई बाली के प्रकोप से बचने के लिए सुग्रीव ने मातंग पहाड़ियों की शरण ली थी और यहीं पर उनकी मुलाकात हनुमान और लक्ष्मण से हुई थी. पुराणों में इस क्षेत्र को किष्किंधा भी कहा गया है, जो वानरों का क्षेत्र रहा था. बाली का इस क्षेत्र में आना वर्जित था, जिसकी वजह से सुग्रीव ने मातंग पहाड़ियों की शरण ली थी.

राशिफल 27 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस में भोपाल में "रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन का किया लोकार्पण
बिहान योजना से मिली नई पहचान, पोषण सखी बन महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की बनीं संरक्षक