उत्तराखंड में लौटने के मामलों में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज
पौड़ी गढ़वाल। रोजगार की कमी के चलते उत्तराखंड के पहाड़ लंबे समय से पलायन की कहानी बंया करते हैं। गांव खाली हो चुके हैं, और युवा रोजी-रोटी की तलाश में मैदानों और महानगरों की ओर चल दिए है। लेकिन बीते कुछ सालों में तस्वीर बदलती दिख रही है। अब पहाड़ों की ओर लौटना तेज हुआ है और लोग वापस लौटकर अपने गांव में ही रोजगार तलाशने में जुटे हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में लौटने के मामलों में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि लौटकर आने वाले जिलों में पौड़ी गढ़वाल पहले नंबर पर है, जहां 1213 लोग बड़े शहर छोड़कर वापस पहाड़ों में लौटे हैं। यानी उत्तराखंड में सबसे ज्यादा रिवर्स पलायन पौड़ी जिले में हुआ है।
इसी पौड़ी जिले के ब्लॉक एकेश्वर के गांव चमाली से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जहां दो भाइयों ने पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले भीमल को ही आय का साधन बना लिया है। रिश्तेदारी की एक साधारण सी डिमांड से शुरू हुआ यह प्रयोग आज करोड़ों के टर्नओवर, सैकड़ों महिलाओं को रोजगार और पहाड़ों में टिकाऊ आजीविका का मॉडल बन गया है।
इस काम को करने वालों का कहना है कि जब मैंने काम शुरू किया, तब बैंक के जरिए पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) योजना के तहत मुझे 10 लाख रुपए का लोन मिला। इसी लोन की राशि से मैंने अपना सेटअप स्टार्ट किया। यह लोन दो-तीन साल में पूरा हो गया। इसके अलावा नए प्रोडक्ट्स के लिए सरकार की तरफ से 10 लाख रुपए की सब्सिडी का भी प्रावधान मिला, जिसका मैंने लाभ लिया। राज्य सरकार का कहना है कि अगर सिस्टम को और आगे बढ़ाना है, तब भविष्य में और लोन की सुविधा भी मिल सकती है।

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