100 साल बाद संघ में खत्म हो रही प्रांत प्रचारक की व्यवस्था..........अब संभाग प्रचारक
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 साल पूरे कर चुका है। देश के सबसे बड़े गैर-राजनीतिक संगठन ने इस बीच बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। इसके तहत वह अपने संगठन की संरचना में बदलाव करने जा रहा है। इस बदलाव के तहत अब प्रांत प्रचारक की व्यवस्था आरएसएस में समाप्त होगी। आरएसएस की कार्य पद्धति में प्रांत प्रचारक को बड़ा महत्व मिलाता रहा है, लेकिन अब उनके स्थान पर संभाग प्रचारक की व्यवस्था लागू होगी। अब तक संघ अपनी सुविधा के अनुसार एक राज्य में कई प्रांत रखता था। जैसे यूपी में ही मेरठ प्रांत, ब्रज प्रांत, अवध प्रांत, गौरक्ष प्रांत, काशी प्रांत, कानपुर प्रांत रहे हैं। इस प्रकार यूपी में 6 प्रांत होते थे, लेकिन अब प्रांत नहीं संभाग होगा।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में यह फैसला हुआ था। इस फैसले को अब मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में रखा जाना था। लेकिन इसके पहले ही इसकी जानकारी मीडिया में आ गई है। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक ने बताया कि 2026-27 से इस नई व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इसके तहत अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक लेने वाले हैं जिसके तहत दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग प्रचारक होगा। अब तक प्रांत प्रचारक का क्षेत्र बड़ा होता था, लेकिन संभाग प्रचारक का क्षेत्र थोड़ा कम होगा। इससे समन्वय और जमीनी स्तर तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है।
अब क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक होगा। आरएसएस की व्यवस्था में ऐसा पहली बार होगा। इससे पहले क्षेत्र प्रचारक होते थे, जो कई बार दो, तीन या फिर उससे अधिक प्रांतों को मिलाकर बने क्षेत्र में काम देखते थे। अब राज्य प्रचारक होगा और इनका काम राज्य स्तर पर होगा। इसके तहत एक राज्य में एक राज्य प्रचारक होगा और पहले की तरह दो क्षेत्र प्रचारक नहीं। माना जा रहा है कि इससे पूरे राज्य का समन्वय बेहतर होगा। जैसे यूपी का ही उदाहरण लें तब अब तक एक क्षेत्र प्रचारक पूर्वी यूपी का होता था, जिसके अंतर्गत अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत आते थे।
इस प्रकार पश्चिम यूपी का एक क्षेत्र प्रचारक होता था। इसके तहत मेरठ, ब्रज और उत्तराखंड प्रांत आते थे। अब यह व्यवस्था समाप्त होगी। यूपी का एक राज्य प्रचारक और उत्तराखंड का एक अलग राज्य प्रचारक होगा। वहीं राजस्थान प्रांत को उत्तर क्षेत्र में मिलाने की तैयारी है। अब तक उत्तर क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर ही शामिल थे। अब राजस्थान को भी इसी का हिस्सा बनाने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इससे पूरे राज्य का एक यूनिट के तौर पर काम देखा जा सकेगा। इसके अलावा प्रांत की बजाय संभाग के तौर पर काम करने से निचले स्तर तक निगरानी तंत्र बेहतर होगा। नई व्यवस्था के तहत देशभर में 9 क्षेत्र प्रचारक और कुल 75 संभाग प्रचारक बनाए जाएगें।

सामूहिक विवाह समाज में समानता, सादगी और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने का अनुकरणीय माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
माओवाद के बाद विकास की नई राह: पुसपाल बनेगा ईको-टूरिज्म हब
मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर को कम करने में सभी की सहभागिता आवश्यक - उप मुख्यमंत्री शुक्ल
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 में सनातन का वैभव दुनिया को दिखेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बस्तर के लिए खुलेगा वैश्विक द्वार, 4 घंटे में पूरा होगा समंदर तक का सफर
करीब 150 मीटर लम्बे सुरंग में अवैध कोयला खनन पर सख्ती, सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वाड की बड़ी कार्रवाई
पीएमश्री हेली सेवा के रूप में ओरछा के लिए शुरू की गई पुष्पक विमान की व्यवस्था : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सामूहिक विवाह बढ़ाते है समाज में समरसता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव