23 फरवरी से लगेगा होलाष्टक, 9 दिन तक बंद रहेंगे शादी-विवाह
शादी विवाह सात जन्मों का बंधन होता है. इसके लिए शुभ लग्न का होना काफी जरूरी है. फरवरी में फिलहाल शादी विवाह के धूम धड़ाके का दौर जारी है. लेकिन, जल्द ही इस पर ब्रेक लगने वाली है. दरसअल, सनातन धर्म में रंगों के त्योहार होली से पहले होलाष्टक पड़ता है. शास्त्रों में होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ नहीं माना जाता है. यही वजह है की इन आठ दिनों तक शादी विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.
फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष के अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी से होगी, जो 3 मार्च तक रहेगा. ऐसे में इस बार होलाष्टक 8 नहीं बल्कि 9 दिनों का होगा. इन नौ दिनों के बाद मार्च में फिर शादी विवाह और मांगलिक कार्यो की शुरुआत हो जाएगी.
चंद्रग्रहण का भी असर
पंडित सुभाष पांडेय ने बताया कि आम तौर पर होलिका दहन के साथ होलाष्टक भी समाप्त हो जाता है. लेकिन, इस बार होलिका दहन 2 मार्च को होगा. क्योंकि 3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है. इस दिन शाम तक पूर्णिमा तिथि है. ऐसे में होलाष्टक 3 मार्च तक रहेगा.
भूलकर भी न करें ये काम
होलाष्टक के दिनों में नए बिजनेस या नए काम के श्री गणेश से भी बचना चाहिए. इसके साथ ही, इस समय में नए घर की रजिस्ट्री या उसके निर्माण का काम भी नहीं शुरू कराना चाहिए. शास्त्रों में इसकी भी मनाही है. वहीं, इस समय में शादी, मुंडन, पूजा अनुष्ठान, इंगेजमेंट, गृह प्रवेश जैसे शुभ कामों से बचना चाहिए.
प्रहलाद और होलिका से जुड़ी है कहानी
होलाष्टक से जुड़ी कथा भगवान विष्णु के ओम भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से जुड़ी हुई है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक के इन आठ दिनों में ही प्रहलाद के पिता हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को कई यातनाएं दी थी और अंतिम दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा जिसमें होलिका तो जल गई लेकिन, प्रहलाद सुरक्षित बच गए. इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में अच्छा नहीं माना जाता है.

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