36 बंदियों ने की आत्महत्या, जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल
भोपाल|मध्यप्रदेश की जेलों में एक अप्रैल 2020 से पिछले 70 महीनों के दौरान 715 कैदियों की मौत हो चुकी है. इनमें 36 बंदियों ने आत्महत्या की, जबकि 54 कैदी जेल से फरार हो गए. यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायक उमाकांत शर्मा के सवाल के लिखित जवाब में दी|
जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 11 केंद्रीय जेल, 41 जिला जेल, 73 उपजेल और 8 खुली जेल संचालित हैं. इसके बावजूद जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रखे जा रहे हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है. सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश की 15 जेलों की बाउंड्रीवाल पर इलेक्ट्रिक वायर फेंसिंग लगाई गई है, ताकि कैदी दीवार फांदकर फरार न हो सकें. अन्य जेलों में भी यह कार्य प्रक्रियाधीन है. सभी जेलों को सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़ा गया है|
जेलों में कैदियों को दिया जा रहा तकनीकी प्रशिक्षण
सरकार ने जेलों में सुधार और पुनर्वास की दिशा में भी कदम उठाने का दावा किया है. प्रदेश की 13 सर्किल जेलों और 11 जिला जेलों में विभिन्न उद्योग संचालित किए जा रहे हैं, जहां बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है. वर्ष 2025 में 2828 बंदियों को इन उद्योगों में प्रशिक्षण प्रदान किया गया. इसके अलावा तीन जेलों में आईटीआई संचालित हैं, जिनमें वर्ष 2025 के दौरान 96 बंदियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया|शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल की गई है. वर्ष 2025 में विभिन्न कक्षाओं में 1007 बंदियों ने अध्ययन किया, 550 बंदी हिंदी राष्ट्रभाषा परीक्षा में शामिल हुए. 6,646 बंदियों को साक्षर बनाया गया. सरकार का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों का पुनर्वास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है|
नई जेलों का किया जा रहा है निर्माण
इस बीच, जेलों में बढ़ती संख्या को देखते हुए नए कारागारों का निर्माण भी किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने विधायक अर्चना चिटनीस के प्रश्न के उत्तर में बताया कि सीहोर जिले के ग्राम बिजौरी, शिवपुरी के ग्राम बड़ौदी, अनूपपुर के ग्राम दुलहरा, भिंड के रतनपुरा, बुढार, रुंगटा, कन्नौद, अंबाड़ा, बुरहानपुर के बहादरपुरा, इंदौर के ग्राम पचडेरिया और छिंदवाड़ा के ग्राम पचडेरिया में नई जेलों का निर्माण कार्य चल रहा है|हालांकि मौतों और आत्महत्याओं के आंकड़े जेल प्रबंधन और बंदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. विपक्ष का कहना है कि जेलों में भीड़, मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सके|

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