जैसलमेर में पहली बार जैन समाज का चादर महोत्सव.....जैन संत के ये वस्त्र लोगों के दर्शन के लिए आए
जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर में पहली बार चादर महोत्सव होने जा रहा है। इसकी शुरुआत को हो चुकी थी। जैन समाज के चादर महोत्सव में देश-विदेश से 25 हजार श्रद्धालु पहुंचे हैं। महोत्सव में आने वाले श्रद्धालु जैन संत दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के 872 साल पुराने वस्त्रों के दर्शन किए। करीब 144 साल बाद पहली बार ये वस्त्र बाहर लोगों के दर्शन के लिए आए हैं।
इस लेकर शनिवार को जैसलमेर के सोना किले से शोभायात्रा निकाली गई। यहां से शोभायात्रा गढ़ीसर लेकर पहुंची। इसके पूर्व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने वरघोड़ा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान ड्रोन से फूलों की बारिश की गई। सोनार किले से विंटेज कार में चादर को देदांसर ग्राउंड पर लेकर आए थे। आयोजन स्थल पर पानी के जहाज की तरह रथ बनाया गया, जिसमें चादर को दर्शन के लिए रखा गया।
शोभायात्रा के रूप में निकला यह वरघोड़ा पवित्र चादर को लेकर महोत्सव स्थल पहुंचा। महोत्सव स्थल पर परंपरानुसार चादर का विधिवत अभिषेक हुआ। वहीं देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं की सहभागिता से दादागुरु इकतीसा के 1 करोड़ 8 लाख सामूहिक पाठ होगा।
जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया कि इतिहास के अनुसार, विक्रम संवत 1211 में जब अजमेर में दादा गुरुदेव का स्वर्गवास हुआ, तब उनके अंतिम संस्कार की अग्नि में उनका शरीर तब विलीन हो गया, लेकिन उनके वस्त्र पूरी तरह सुरक्षित रहे। ये वस्त्र बाद में गुजरात के पाटन पहुंचे।
जब करीब 145 साल पहले जैसलमेर में भयंकर महामारी फैली थी। तब यहां के राजा (महारावल) ने इन पवित्र वस्त्रों को पाटन से जैसलमेर मंगवाया था। माना जाता है कि इन वस्त्रों के आते ही जैसलमेर महामारी से मुक्त हो गया था। तब से ये वस्त्र जैसलमेर के ज्ञान भंडार में सुरक्षित रखे हुए हैं। जैन समाज के इतिहास में इस तरह का चादर महोत्सव पहली बार आयोजित किया जा रहा है।

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