खौफनाक हमला: ओमान के पास भारतीय नाविकों ने बचाई अपनी जान
मुंबई: खाड़ी क्षेत्र में 'स्काई लाइट' जहाज पर हुए भयानक हमले में फंसे भारतीय नाविकों को आखिरकार बचा लिया गया है. इस हादसे में सुरक्षित बचे दो नाविक, अब्दुल रहमान मंडल और विक्रम घोष मुंबई लौट आए हैं. इस खौफनाक हादसे के बाद दोनों नाविक गहरे सदमे में थे. यहां, आपबीती बताते हुए कहा- 'अब, हम चैन की नींद सो सकते हैं.'
घटना का विवरण
अब्दुल रहमान ने बताया, "1 मार्च 2026 को जब हम ओमान के खसाब बंदरगाह के पास थे, तब हमारे जहाज 'स्काई लाइट' पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ. सुबह करीब 6:45 से 7:00 बजे के बीच एक जोरदार धमाका हुआ. मैं बिस्तर से गिर गया. मेरी नींद खुल गई. हर तरफ धुआं ही धुआं था. अपनी जान बचाने के लिए हर कोई दरवाजा खोलकर बाहर भाग रहा था."
उन्होंने आगे बताया, "बाहर आने के बाद हमें एहसास हुआ कि हमारे कैप्टन और ऑयलर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं. हमने उन्हें जोर-जोर से आवाजें दीं, लेकिन काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला." जहाज पर कुल 10 भारतीय और 12 ईरानी कर्मचारी और अधिकारी मौजूद थे. ईरानी कर्मचारी तेल के टैंकों की सफाई के लिए आए थे.
कैसे बची जान
अब्दुल ने बताया, "हमने दूर एक दूसरा जहाज देखा. लेकिन वह पहले हमारे पास नहीं आया. हम मदद के लिए चिल्ला रहे थे. लगभग 45 मिनट से एक घंटे बाद, जब हमने उन्हें बताया कि हमारे तेल के टैंक खाली हैं, तब वे हमारे करीब आए. इसके बाद, सभी ने लाइफ जैकेट पहनी और रस्सियों के सहारे दूसरे जहाज पर चढ़कर अपनी जान बचाई."
अब्दुल ने बताया कि कैप्टन आशीष कुमार और ऑयलर दलीप सिंह का कोई सुराग नहीं मिला. बाद में पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है. बचाव के बाद सभी को ओमान के खसाब बंदरगाह ले जाया गया, जहां घायलों का इलाज हुआ. वहां से वे 18 तारीख को भारत लौटे.
विक्रम घोष ने बताया, "ओमान में रहते हुए हम हर पल इस डर में थे कि फिर से हमला हो सकता है. जहां हम थे, वहां से हमारा जहाज साफ दिख रहा था और आसपास अभी भी धमाके हो रहे थे." उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास न तो सामान बचा था और न ही कोई दस्तावेज. भारत सरकार ने हमारे लिए 'व्हाइट कार्ड' (आपातकालीन यात्रा दस्तावेज़) जारी किए, जिसके बाद हमें ओमान से भारत लाया गया."
650 भारतीय नाविक खतरे में
'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि वर्तमान में ईरान और आसपास के क्षेत्र में 22 भारतीय जहाजों पर लगभग 650 भारतीय चालक दल और अधिकारी तैनात हैं. इसके अलावा, विदेशी झंडे वाले जहाजों पर करीब 23,000 भारतीय काम कर रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से इन सभी की सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है और कहा कि उनका संगठन इस बारे में लगातार सरकार के संपर्क में है.

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