राजस्थान का अद्भुत धाम, जहां बाल रूप में पूजे जाते हैं भगवान राम
सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले के माउंटआबू में रामनवमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की भक्ति का उत्सव पूरे क्षेत्र में देखने को मिला। माउंटआबू अपने हिल स्टेशन के लिए तो प्रसिद्ध ही है, लेकिन यहां धार्मिक महत्व भी कम नहीं है। यहां पर स्थित श्रीसर्वेश्वर रघुनाथ मंदिर, अपनी अनोखी विशेषताओं के लिए जाना जाता है।
मंदिर की क्या है खासियत
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान श्रीराम अकेले बालस्वरूप में विराजमान हैं, जबकि भाई लक्ष्मण और माता सीता साथ नहीं हैं। मंदिर में स्थापित प्रभु श्रीराम की मूर्ति स्वयंभू है और इसका इतिहास 5500 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि लगभग 700 साल पहले इसे जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने यहां स्थापित किया था। मूर्ति लगभग साढ़े तीन फीट ऊंची है और इसका मुख पूर्व की ओर है। यही इसे राजस्थान का पहला और इकलौता ऐसा मंदिर बनाता है। इसके साथ ही मंदिर से जुड़ा है ऐसा अनोखा प्राचीन कुंड है। मान्यता है इस पानी से विभिन्न बीमारियों से मुक्ति एवं मानसिक शांति मिलती है।
कहां पर स्थित है कुंड
यह रामकुंड श्रीसर्वेश्वर रघुनाथ मंदिर से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी के नीचे गुफा में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए जंगल से होकर आना होता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने गोमुख वशिष्ठ आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने के बाद यहां पर स्नान किया था। ऐसे में इस कुंड का पानी प्रसाद के समान है। इसके प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है कि इस कुंड के पानी से क प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है और यह मानसिक शांति देने वाला है। माउंट आबू का यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अनोखा होने के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल है, जो आज भी भक्तों के लिए भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर में देशभर से आते हैं श्रद्धालु
रामानंद संप्रदाय के साधु आज भी इस मंदिर में भगवान श्रीराम की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। रामनवमी और पाटोत्त्सव जैसे अवसरों पर मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर के पास ही रामकुंड स्थित है, जो मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर, पहाड़ी की तलहटी में जंगल के बीच एक गुफा में स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने गोमुख वशिष्ठ आश्रम से शिक्षा प्राप्त करने के बाद यहीं स्नान किया था। इस कुंड का जल श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे पीने या स्नान करने से शारीरिक रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

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