अभद्र बयान पर बवाल: जाट महासभा ने पलसानिया पर केस दर्ज कराने की दी चेतावनी
जयपुर। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर जाट समाज आक्रोशित है। इसे लेकर राजस्थान में भी विरोध तेज हो गया है। जयपुर में अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक अध्यक्ष रामावतार पलसानिया द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर कड़ा विरोध जताया गया। महासभा ने इस बयान को न केवल अमर्यादित और निंदनीय करार दिया, बल्कि राजस्थान में भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। महासभा का कहना है कि महापुरुषों के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यूपी में पलसानिया के खिलाफ आठ एफआईआर दर्ज
प्रदेश सचिव कृष्ण कुमार जानू ने जानकारी दी कि यह विवाद मेरठ में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान सामने आया था, जहां पलसानिया द्वारा की गई टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ करीब आठ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी इसी तर्ज पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की अभद्र टिप्पणी करने का साहस न कर सके।
किसानों के मसीहा थे चौधरी चरण सिंह
पूर्व प्रदेश महासचिव एवं प्रदेश सचिव राजपाल चौधरी ने अपने बयान में कहा कि चौधरी चरण सिंह किसानों के मसीहा थे, जिन्होंने जात-पात से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक जाति तक सीमित नहीं होते, बल्कि पूरे देश की धरोहर होते हैं। ऐसे व्यक्तित्वों पर अभद्र टिप्पणी करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और समाज इसका विरोध करता रहेगा।
अंतरजातीय विवाह पर खुलकर रखी बात
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय लोक दल के प्रदेश महासचिव शीशराम कटेवा ने समाज के भीतर चल रहे अंतरजातीय विवाह के मुद्दे पर भी खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जाट समुदाय के भीतर सामाजिक बदलाव तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में युवा अविवाहित हैं, जिसका एक प्रमुख कारण शिक्षा का असंतुलन है—लड़कियां अधिक शिक्षित हो रही हैं, जबकि लड़कों में यह अनुपात अपेक्षाकृत कम है। इस कारण पारंपरिक जातीय विवाहों में कठिनाई आ रही है। कटेवा ने स्पष्ट कहा कि जाट महासभा से जुड़े अधिकांश लोग अंतरजातीय विवाह के पक्ष में हैं और इसे बढ़ावा देने की सोच रखते हैं। उन्होंने इसे सामाजिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि बदलते समय के साथ समाज को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।
तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए
राजपाल चौधरी ने भी इस विषय को निजी निर्णय बताते हुए कहा कि विवाह व्यक्तिगत पसंद का विषय है और इसमें किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह स्वयं जातिवाद के विरोधी थे और समाज को आगे बढ़ाने के लिए जात-पात समाप्त करने की बात करते थे। कृष्ण कुमार जानू ने अपने वक्तव्य में यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए अंतरजातीय विवाह के मुद्दे को उछाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में अखिल भारतीय जाट महासभा और अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के बीच हुई बैठक में अंतरजातीय विवाह को स्वीकार्य माना गया था। इसके बावजूद इस मुद्दे पर विवाद खड़ा करना केवल राजनीतिक स्वार्थ को दर्शाता है।

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