खुशखबरी किसानों के लिए: मध्य प्रदेश में फसल ऋण की नई नीति लागू, दो बार की जगह केवल एक बार भुगतान
MP News: मध्य प्रदेश सरकार ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. राज्य में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से खरीफ और रबी फसलों के लिए अल्पावधि ऋण लेने वाले किसानों को अब साल में दो बार भुगतान नहीं करना होगा. सरकार ऐसी नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसमें किसान साल में एक बार, मई या जून के आसपास, दोनों सीजन का ऋण एक साथ चुका सकेंगे. इस कदम का उद्देश्य किसानों को आर्थिक दबाव से राहत देना और उन्हें डिफॉल्टर बनने से बचाना है.
पुरानी व्यवस्था में दो बार भुगतान की मजबूरी
अब तक किसानों को अलग-अलग सीजन के लिए अलग समय पर ऋण चुकाना पड़ता था. खरीफ ऋण की अंतिम तिथि 28 मार्च तय थी, जबकि रबी ऋण जून में चुकाना होता था. इस व्यवस्था के कारण कई बार किसानों को फसल बिकने से पहले ही भुगतान करना पड़ता था, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ जाती थी.
खरीदी में देरी से बढ़ी किसानों की परेशानी
इस बार गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद समय पर शुरू नहीं हो सकी. ऐसे में किसानों के पास पर्याप्त नकदी नहीं थी, जिसके चलते वे ऋण चुकाने में असमर्थ रहे. किसानों ने सरकार से अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग भी की थी, ताकि उन्हें राहत मिल सके.
मुख्यमंत्री के निर्देश पर नई योजना तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहकारिता और वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसान साल में एक बार ही दोनों सीजन का ऋण चुका सकें. अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है और इसे जल्द कैबिनेट में पेश किया जाएगा.

बिना ब्याज ऋण से मिल रही है मदद
राज्य सरकार सहकारी समितियों के जरिए किसानों को तीन लाख रुपये तक का बिना ब्याज अल्पकालीन फसल ऋण उपलब्ध कराती है. वर्ष 2024-25 में करीब 35 लाख किसानों को 21,232 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया, जिससे खेती की लागत कम करने में मदद मिली.
तिथि बढ़ाने से जुड़ी हैं वित्तीय चुनौतियां
अधिकारियों का कहना है कि ऋण अदायगी की तारीख बढ़ाने से केंद्र सरकार से मिलने वाले ब्याज अनुदान में देरी होती है. साथ ही कंप्यूटरीकृत सिस्टम में ड्यू डेट और ब्याज गणना में बदलाव करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसी स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय भार राज्य सरकार को उठाना पड़ सकता है.

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