पुरुष कार्यकर्ताओं को मंच से हटाकर महिलाओं को बैठाने का फैसला चर्चा में
बांसवाड़ा। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भारतीय जनता पार्टी देशभर में पार्टी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी के अंतर्गत दो दिन की यात्रा पर आईं पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने बुधवार को बांसवाड़ा में इस कार्यक्रम का आगाज किया। इससे पहले उन्होंने मंच पर बैठे पुरुष पदाधिकारियों को उठाकर सामने बिठाया और मंच पर महिला पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को स्थान दिया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बुधवार दोपहर भाजपा कार्यालय पहुंचीं। यहां जिलाध्यक्ष पूंजीलाल गायरी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने गाजे-बाजे से उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सीधे पार्टी कार्यालय के सभागार में पहुंचीं। सभागार में मंच पर उनके समीप जिलाध्यक्ष गायरी, विधायक, पूर्व मंत्री धनसिंह रावत, भवानी जोशी, संसदीय सचिव भीमा भाई आदि बैठे थे, जबकि सामने की ओर महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष शीतल भंडारी और अन्य महिला पदाधिकारी बैठी थीं।
वसुंधरा राजे ने मंच पर अपने समीप बैठे सभी पुरुष पदाधिकारियों से कहा कि वे सामने कुर्सियों पर बैठें। आज मंच पर महिलाओं को बैठने का अवसर मिलेगा। इसके बाद सभी पुरुष पदाधिकारी सामने जाकर बैठ गए और मंच पर पूर्व सभापति मंजुबाला पुरोहित, पूर्व जिला प्रमुख लक्ष्मी निनामा, प्रधान निर्मला मकवाना, लीला पडियार, गायत्री शर्मा और सोनिया वैष्णव सहित महिला पदाधिकारियों को बैठाया गया।
मोदी ने बढ़ाया महिलाओं का मान-सम्मान
अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने त्रिपुरा सुंदरी का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम 2023 में पारित हुआ था और आगामी 2029 से लोकसभा व विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं का मान-सम्मान बढ़ाने का कार्य किया है। महिलाओं को आगे बढ़ाने का यह अभियान बांसवाड़ा से शुरू किया गया है, जो उनके सम्मान का प्रतीक है।
राजे ने कहा कि महिलाओं ने वर्षों से यह सपना देखा था लेकिन उन्हें राजनीति में पर्याप्त अवसर नहीं मिलते थे। अब इस अधिनियम से उन्हें सम्मान और भागीदारी दोनों मिलेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाएं अक्सर घर-परिवार के कार्यों में व्यस्त रहती हैं और कई बार राजनीति को पार्ट-टाइम रूप में लेने की सोचती हैं, जबकि राजनीति पार्ट-टाइम का कार्य नहीं है। यह अधिनियम महिलाओं को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में लाएगा और लैंगिक समानता को भी मजबूत करेगा।

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