चार पीढ़ियों के गवाह समीर अंजान बोले- आज की पीढ़ी भावनाओं को 'झूठा' और 'प्रैक्टिकल' होना सही मानती है।
बॉलीवुड की चार पीढ़ियों को अपनी कलम से सजाने वाले दिग्गज गीतकार समीर अंजान ने अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान और ऋतिक रोशन तक की फिल्मों के लिए सदाबहार गाने लिखे हैं। 1980 से अपने करियर की शुरुआत करने वाले समीर ने बदलते वक्त के साथ खुद को ढाला है, लेकिन आज की 'जेन जी' (Gen Z) पीढ़ी की पसंद उनके लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है।
जेन जी और गीतों के प्रति बदलता नजरिया समीर अंजान का मानना है कि वर्तमान दौर में संगीत का शोर इतना बढ़ गया है कि शब्दों की अहमियत कहीं खो गई है। वे कहते हैं, ‘आज की पीढ़ी को सिर्फ साउंड और म्यूजिक बीट चाहिए, वे शब्दों की गहराई में नहीं उतरना चाहते। इसका एक बड़ा कारण यह है कि आज की पीढ़ी भावनाओं (Emotions) के बजाय प्रैक्टिकल होने को ज्यादा महत्व देती है। जब लोग इमोशंस को ही नहीं जिएंगे, तो वे शब्दों से जुड़ाव कैसे महसूस करेंगे? इसी वजह से गीतों से सार्थक शब्द गायब होते जा रहे हैं।’ समीर इस बदलाव के लिए केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के मार्गदर्शन की कमी को भी जिम्मेदार मानते हैं।
AI भावनाओं की जगह नहीं ले सकता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चल रही बहस पर समीर अंजान के विचार काफी स्पष्ट हैं। वे इसे रचनात्मकता के लिए खतरा नहीं मानते। उनके अनुसार, ‘एआई पुराने लिखे को संशोधित तो कर सकता है, लेकिन नई भावनाएं पैदा नहीं कर सकता। एआई ने न कभी इश्क किया है और न उसका कभी दिल टूटा है, तो वह मानवीय संवेदनाओं और दर्दों को शब्दों में कैसे पिरो सकता है?’
अनुभव और हकीकत से उपजते हैं गीत समीर अंजान का कहना है कि एक लेखक वही लिखता है जो वह अपने आसपास देखता और महसूस करता है। वे आज भी आम लोगों के बीच रहना पसंद करते हैं ताकि उनके जीवन और संघर्ष को समझ सकें। वे कहते हैं, ‘जब आप लोगों के दर्द को महसूस करते हैं, तभी आपकी रूह से ऐसे गीत निकलते हैं जिनसे आम आदमी खुद को जोड़ पाता है।’
जब अंडरवर्ल्ड से आया भावुक कॉल अपने करियर की एक चौंकाने वाली घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार सुबह चार बजे उन्हें अंडरवर्ल्ड से एक फोन आया। फोन पर व्यक्ति शराब के नशे में रो रहा था और उसने कहा कि समीर साहब, आपने 'जिंदगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए' गाने की दो लाइनों में मेरी पूरी जिंदगी की हकीकत लिख दी है। समीर कहते हैं कि वह गाना उनके अपने जीवन के अभावों और संघर्षों की उपज था, जिसने एक अपराधी के दिल को भी झकझोर दिया।

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