करियर का टर्निंग पॉइंट: 2011 की वो मायूसी, जिसने रोहित को बना दिया दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज
टीम इंडिया के पूर्व चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने स्वीकार किया है कि 2011 विश्व कप की टीम से रोहित शर्मा को बाहर रखना एक कठिन फैसला था। क्रिकेट विश्लेषक अयाज मेमन से चर्चा के दौरान श्रीकांत ने कहा, 'मुझे रोहित के लिए आज भी बुरा लगता है। मैंने पिछले साल उनसे मिलकर माफी भी मांगी थी।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय चयनकर्ताओं का ध्यान ऐसे खिलाड़ियों पर था जो 'हाफ ऑलराउंडर' की भूमिका निभा सकें, ठीक वैसे ही जैसे 1983 की विजेता टीम में थे। टीम में युवराज सिंह, यूसुफ पठान, सुरेश रैना और सचिन तेंदुलकर जैसे विकल्प मौजूद थे जो गेंदबाजी भी कर सकते थे। इसी तकनीकी संतुलन के कारण तब 23 वर्षीय रोहित को जगह नहीं मिल पाई थी।
रोहित ने उस दौर को अपने करियर का सबसे बड़ा सबक बताया। उस समय दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने रोहित को टूटते देख उन्हें ढांढस बंधाया था और अपनी कमियों पर काम करने की सलाह दी थी। युवी की उस प्रेरणा ने रोहित के करियर की दिशा बदल दी, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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