जीत के बाद मंदिर में पूजा-अर्चना, भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने लिया आशीर्वाद
नई दिल्ली: देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है, जिसमें सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है। बंगाल की धरती पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ अपनी सत्ता स्थापित की है और पंद्रह वर्षों से चले आ रहे तृणमूल कांग्रेस के शासन का अंत कर दिया है। इस ऐतिहासिक विजय का आभार जताने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली के प्रसिद्ध सीआर पार्क स्थित काली बाड़ी मंदिर में शीश नवाया और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
बंगाल में खिला कमल और ममता के अभेद्य किले का पतन
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है क्योंकि जिस भाजपा के पास कभी शून्य सीटें थीं, उसने इस बार 206 सीटों का विशाल आंकड़ा पार कर टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया है। मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार शुभेंदु अधिकारी ने न केवल अपनी परंपरागत सीट नंदीग्राम बचाई बल्कि भवानीपुर के हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भी ममता बनर्जी को शिकस्त देकर सबको चौंका दिया। इस हार की गूंज इतनी गहरी रही कि ममता सरकार के लगभग बीस मंत्रियों को भी जनता के आक्रोश का सामना करते हुए अपनी सीटें गंवानी पड़ीं और तृणमूल कांग्रेस महज अस्सी सीटों पर सिमट कर रह गई।
मंदिर में पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक विरासत का संकल्प
राजधानी दिल्ली में जीत का जश्न मनाते हुए भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज समेत कई दिग्गज नेता मंदिर पहुंचे और मां काली का आशीर्वाद लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बंगाल की जनता का कोटि-कोटि नमन किया और विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की प्राचीन संस्कृति और विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा की यह जीत केवल राजनीतिक सत्ता का परिवर्तन नहीं है बल्कि बंगाल के गौरव को पुनर्जीवित करने की एक नई शुरुआत है।
शून्य से शिखर तक के सफर में संघर्ष की जीत
वर्ष 2011 में बंगाल विधानसभा में बिना किसी प्रतिनिधित्व वाली भाजपा का 206 सीटों तक पहुंचना कार्यकर्ताओं के निरंतर संघर्ष और जनता के भरोसे की जीत मानी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के डेढ़ दशक पुराने प्रभाव को खत्म करने के लिए भाजपा ने जो संगठनात्मक रणनीति अपनाई, उसने अंततः राज्य के हर कोने में अपनी पैठ बना ली। अब जबकि चुनावी परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं, भाजपा नेतृत्व का पूरा ध्यान राज्य में शांति बहाली और विकास के उन वादों को पूरा करने पर है जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल की जनता से किए थे।

बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, असम में बाढ़ से 50 की मौत, हजारों घरों में ब्लैकआउट
गुरुग्राम में RWA पदाधिकारियों पर शिकंजा, कार्यालय में बवाल के बाद FIR
इराक से वेस्ट बैंक तक हिंसा, धमाकों और गोलीबारी से फिर भड़का तनाव
बैठक खत्म, सहमति नहीं; कल फिर आमने-सामने होंगे सरकार और CJP
अस्पताल में सेवाएं प्रभावित, 21 कर्मचारियों की नौकरी जाने पर बढ़ा विवाद
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, विवाहित बेटियों को भी मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार
समुद्र में शक्ति प्रदर्शन! चीन-फिलीपींस विवाद ने फिर बढ़ाया क्षेत्रीय तनाव
तृतीय सोपान एवं निपुण टेस्टिंग कैंप का आगाज, स्काउट्स-गाइड्स करेंगे हुनर का प्रदर्शन
प्रदर्शन के बीच दिल्ली में सख्ती, इंटरनेट पर पाबंदी और मेट्रो सेवाएं प्रभावित
वकीलों की CJI से गुहार, पीएम आवास के पास प्रदर्शन पर जताई चिंता