सरकार का बड़ा फैसला, अब बढ़ेगी कर्मचारियों की जेब
नई दिल्ली: बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते में संशोधन की घोषणा की है, जिससे उनके मासिक वेतन में आंशिक वृद्धि देखने को मिलेगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मई से जुलाई 2026 की तिमाही के लिए महंगाई भत्ते को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 25.70 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, भत्ते में हुई इस 0.70 प्रतिशत की मामूली वृद्धि को लेकर बैंक यूनियनों और कर्मचारियों के बीच असंतोष का भाव देखा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान महंगाई दर के मुकाबले यह इजाफा बेहद कम है।
वेतनमान के अनुसार मामूली आर्थिक लाभ
महंगाई भत्ते में की गई इस हालिया बढ़ोतरी का सीधा असर बैंक कर्मियों की जेब पर पड़ेगा, लेकिन इसकी राशि बहुत अधिक नहीं होगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न वेतन श्रेणियों के आधार पर कर्मचारियों के मासिक वेतन में 435 रुपये से लेकर 1,050 रुपये तक की ही वृद्धि संभव हो पाएगी। उदाहरण के तौर पर, जिन कर्मियों का मूल वेतन 48,480 रुपये है, उन्हें हर महीने मात्र 435 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जबकि 1,08,260 रुपये की अधिकतम बेसिक सैलरी पाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में केवल 965 रुपये का इजाफा दर्ज किया जाएगा।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर गणना
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस नए भत्ते का निर्धारण मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। सूचकांक के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो जनवरी में यह 148.6 पर था, जो फरवरी में मामूली गिरकर 148.5 हुआ और मार्च में बढ़कर 149.1 के स्तर पर पहुंच गया। इन तीन महीनों के औसत के आधार पर जब 2016 के आधार सूचकांक से तुलना की गई, तो कुल अंतर 25.70 अंक निकलकर आया, जिसके चलते आगामी तिमाही के लिए भत्ते में 0.70 अंकों की बढ़ोतरी तय की गई है।
महंगाई के दौर में कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह बढ़ोतरी तकनीकी गणना के अनुसार सटीक है, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह कर्मचारियों को बड़ी राहत देने में विफल रही है। भत्ते में वृद्धि का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की क्रय शक्ति को महंगाई के साथ तालमेल बिठाने में मदद करना होता है, परंतु न्यूनतम 435 रुपये की वृद्धि को बैंक कर्मी ऊंट के मुंह में जीरा समान मान रहे हैं। विभाग का तर्क है कि यह संशोधन सुनिश्चित करता है कि सरकारी नीतियों के तहत समय-समय पर मिलने वाले लाभ निरंतर जारी रहें, भले ही उनकी मात्रा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार कम प्रतीत हो रही हो।

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