पीएम मोदी ने दोहराया संकल्प, आतंकवाद पर जारी रहेगा प्रहार
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों की असाधारण वीरता और उनके अटूट संकल्प को नमन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए कहा कि ठीक एक साल पहले भारतीय जांबाजों ने पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हमला करने वाली कायराना ताकतों को उनके घर में घुसकर मुंहतोड़ जवाब दिया था। प्रधानमंत्री ने इस अभियान को भारतीय सेना की सटीकता और साहस का बेजोड़ उदाहरण बताया और कहा कि यह कार्रवाई वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और अटूट राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का जीवंत प्रमाण है।
आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई रक्षा नीति
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर महज एक सैन्य जवाबी कार्रवाई नहीं थी बल्कि यह आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का एक बड़ा शंखनाद था। मोदी के अनुसार इस अभियान ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि नया भारत अब अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और आतंकी हमलों का जवाब अब उसी भाषा में दिया जाएगा जिसे हमलावर और उनके आका समझते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने एक ऐसा नया रक्षा सिद्धांत स्थापित कर दिया है जिसके तहत आतंकियों को पनाह देने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी और देश अब किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी के दबाव में नहीं आएगा।
आत्मनिर्भरता और सैन्य समन्वय की ऐतिहासिक सफलता
इस गौरवशाली वर्षगांठ पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की भी सराहना की और बताया कि स्वदेशी प्रयासों ने सेना के मनोबल और मारक क्षमता को और अधिक सुदृढ़ किया है। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल सेना की पेशेवर तैयारी को साबित किया बल्कि विभिन्न सुरक्षा अंगों के बीच मौजूद बेहतरीन समन्वय को भी प्रदर्शित किया जिससे सुरक्षा घेरा पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो गया है। सरकार ने यह विश्वास दिलाया कि आतंकवाद को पालने वाले पूरे तंत्र को जड़ से खत्म करने के लिए भारत आज भी उसी संकल्प और ऊर्जा के साथ काम कर रहा है जैसा एक साल पहले था।
एयरस्ट्राइक के जरिए आतंकी ठिकानों का खात्मा
गौरतलब है कि पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारत ने 7 मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर का बिगुल फूंका था। भारतीय वायुसेना और थल सेना के साझा पराक्रम ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की सीमाओं को लांघकर नौ प्रमुख आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर सटीक निशाना साधा था। इस साहसिक एयरस्ट्राइक में करीब 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे और उनके पूरे बुनियादी ढांचे को जमींदोज कर दिया गया था। इस कार्रवाई ने यह तय कर दिया कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने में सक्षम है।

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