63 साल में बदला दिल्ली का नक्शा, गांव बने शहर लेकिन विकास नहीं पहुंचा
नई दिल्ली: देश की राजधानी अब आधिकारिक रूप से पूर्णतः 'शहरी' हो गई है। हाल ही में 48 गांवों को शहरीकृत (Urbanized) घोषित किए जाने के साथ ही दिल्ली के सभी 352 गांवों का ग्रामीण अस्तित्व प्रशासनिक फाइलों में समाप्त हो गया है। नगर निगम (MCD) ने करीब छह दशकों तक चली इस लंबी प्रक्रिया को आठ चरणों में पूरा किया है।
छह दशक का सफर: 1963 से 2026 तक का शहरीकरण
दिल्ली में गांवों को शहर की श्रेणी में लाने का काम पहले मास्टर प्लान के साथ वर्ष 1963 में शुरू हुआ था, जब 19 गांवों को यह दर्जा मिला। इसके बाद 1966, 1982 और 1994 में भी कई गांव इस सूची में जोड़े गए। लैंड पुलिंग पॉलिसी आने के बाद इस प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी और वर्ष 2017 से 2021 के बीच 169 गांवों को शहरीकृत किया गया। अब 2026 में अंतिम 48 गांवों के शामिल होने के साथ ही दिल्ली में अब एक भी 'आधिकारिक गांव' शेष नहीं बचा है।
कागजों पर शहर, सुविधाओं में अब भी पिछड़े
प्रशासनिक रूप से शहर घोषित होने के बावजूद दिल्ली के अधिकांश गांवों की जमीनी हकीकत आज भी नहीं बदली है। स्थानीय निवासियों और पूर्व जन-प्रतिनिधियों का कहना है कि गांवों को शहरी सुविधाएं देने का वादा अब तक अधूरा है। संकरी गलियां, जल निकासी की बदहाल व्यवस्था, पार्किंग की किल्लत और टूटी सड़कें आज भी इन क्षेत्रों की पहचान बनी हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शहरीकरण के नाम पर उन पर केवल नियम और टैक्स लादे गए हैं, जबकि विकास के नाम पर ढांचागत सुधार नगण्य है।
कड़े नियमों का बोझ और निर्माण की चुनौतियां
गांवों के शहरीकृत होते ही वहां दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के भवन उपनियम और संपत्ति कर (Property Tax) जैसे प्रावधान लागू हो गए हैं। ग्रामीणों के लिए अब अपने पुराने मकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण करना एक बड़ी मुसीबत बन गया है। जानकारों का कहना है कि गांवों की पारंपरिक और घनी बसावट को देखते हुए शहरी भवन उपनियम वहां व्यावहारिक नहीं हैं। इसके अलावा, व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों के कारण इन क्षेत्रों की आर्थिक प्रगति भी बाधित हो रही है।
भविष्य की राह: अलग विकास मॉडल की आवश्यकता
शहरी योजनाकारों और पंचायत संघों का मानना है कि केवल घोषणा कर देने से गांव शहर नहीं बन जाते। दिल्ली के इन शहरीकृत गांवों के लिए उनकी ऐतिहासिक और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए एक विशेष विकास मॉडल की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को अब केवल फाइलों तक सीमित न रहकर इन क्षेत्रों में पार्किंग, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, सामुदायिक सुविधाओं और रोजगार के नए अवसरों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ये क्षेत्र वास्तव में 'स्मार्ट शहर' का हिस्सा बन सकें।

सीरिया में बड़ा सड़क हादसा, बस पलटने से 35 लोगों की गई जान
लेक्चरर भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध, हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका
हड़ताल पर बैठे छात्रों का ऐलान, अब मंत्री के खिलाफ खोला मोर्चा
एक साथ 10 इस्तीफे, रालोद में उठे असंतोष के सुर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी
धर्मेंद्र प्रधान विवाद के बीच मायावती का बड़ा कमेंट, पार्टी कैडर को किया सतर्क
होटल की खिड़की बनी मौत का कारण, उदयपुर में 2 साल की बच्ची झील में गिरी
PhonePe की आय में 11% ग्रोथ, फिर भी घाटा 62% बढ़ा