पूर्व रजिस्ट्रार की लापरवाही से DMC के राजस्व को भारी नुकसान
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) में पिछले कुछ सालों के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। एक विशेष ऑडिट रिपोर्ट में साल 2019 से 2025 के बीच हुए इस पूरे घटनाक्रम का बारीकी से आकलन किया गया है, जिसमें सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने और नियमों को ताक पर रखने की बात उजागर हुई है।
करोड़ों की वित्तीय चपत और तत्कालीन रजिस्ट्रार पर गाज
इस विशेष ऑडिट रिपोर्ट में तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क को तय मानकों से कम वसूलने की वजह से सरकारी खजाने को 5.57 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसके लिए सीधे तौर पर तत्कालीन रजिस्ट्रार को ही जिम्मेदार ठहराया गया है।
वेतन भत्तों में गड़बड़ी और रिकवरी की सिफारिश
काउंसिल के भीतर सिर्फ शुल्कों की वसूली में ही लापरवाही नहीं बरती गई, बल्कि आंतरिक खर्चों में भी भारी अनियमितता देखी गई है। ऑडिट में यह बात सामने आई है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य प्रशासनिक खर्चों के नाम पर गलत तरीके से भुगतान किए गए, जिसे देखते हुए अब इस मद में 3.23 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को वापस वसूलने यानी रिकवरी करने की कड़ी सिफारिश की गई है।
पदों के नियमों में हेरफेर और उपहारों पर फिजूलखर्ची
प्रशासनिक स्तर पर मनमानी का दायरा यहीं नहीं सिमटा, बल्कि कर्मचारियों की नियुक्तियों और अन्य खर्चों में भी नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। रिपोर्ट में इस बात का विशेष जिक्र है कि एमटीएस कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध जाकर एलडीसी पदों पर नियमित कर दिया गया, जबकि इसके साथ ही मेडिकल इंश्योरेंस के भुगतानों और महंगे उपहारों की खरीदारी में भी 1.24 करोड़ रुपये से ज्यादा का घपला किया गया है।
त्यागपत्र की प्रक्रिया में भी कायदे-कानूनों की अनदेखी
वित्तीय गड़बड़ियों के अलावा काउंसिल के सर्वोच्च प्रशासनिक पद को छोड़ने की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता का अभाव पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जब रजिस्ट्रार ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो उस दौरान डीएमसी के तय नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसमें अनिवार्य रूप से दिए जाने वाले नोटिस पीरियड की शर्त को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।

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