राजस्थान में संदिग्ध मामला, फल खाने के बाद परिवार की हालत खराब
झुंझुनूं (नवलगढ़)। भीषण गर्मी के इस मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले तरबूज और खरबूजे अब लोगों को राहत देने के बजाय अस्पतालों में पहुंचा रहे हैं। बाजार में फलों को समय से पहले कृत्रिम रूप से पकाने, चमकाने और मोटा मुनाफा कमाने के लिए जहरीले इंजेक्शन, रसायनों (केमिकल्स) और पेस्टीसाइड का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मिलावट फूड पॉइजनिंग की एक बड़ी वजह बन चुकी है। इन दूषित फलों के सेवन से लोगों को गंभीर उल्टी-दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई लोग अस्पताल में भर्ती होने को मजबूर हैं।
खरबूजे का जूस पीते ही पूरा परिवार अस्पताल पहुंचा, युवती भी हुई बेहोश
नवलगढ़ कस्बे के वार्ड 36 में बिना सोचे-समझे फल खाना एक परिवार पर भारी पड़ गया। शनिवार सुबह श्रीराम शर्मा नामक व्यक्ति बाजार से तरबूज और खरबूजे लेकर आए थे। तरबूज अंदर से सड़ा हुआ निकलने के कारण फेंक दिया गया, लेकिन इसके बाद जब घर पर खरबूजे का जूस बनाया गया, तो उसे पीते ही परिवार के पांच सदस्यों— श्रीराम, उनकी बुजुर्ग मां सुमित्रा देवी, पत्नी ज्योति और दो मासूम बेटियों (आरोही व प्रियांशी) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी को आनन-फानन में राजकीय जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसी तरह की एक अन्य घटना में, कस्बे के चूणा चौक में तरबूज का जूस पीने के महज एक घंटे बाद एक युवती अचानक अचेत (बेहोश) होकर गिर पड़ी, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से प्राथमिक उपचार दिया गया।
केमिकल और जहरीले इंजेक्शन सीधे आंतों पर कर रहे हमला: डॉक्टर
राजकीय जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि इन दिनों तरबूज, खरबूजे और आम खाने की वजह से फूड पॉइजनिंग के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने खुलासा किया कि फलों में मिठास, वजन और लाल रंग बढ़ाने के लिए जो इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, वे मानव शरीर के लिए बेहद घातक हैं। ये जहरीले रसायन पेट में जाते ही पाचन तंत्र के लिए जरूरी 'अच्छे बैक्टीरिया' को पूरी तरह खत्म कर देते हैं, जिससे उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
गुनगुने पानी से ऐसे करें तरबूज में मिलावट की पहचान
चिकित्सकों ने आम जनता को जागरूक रहने और केवल विश्वसनीय दुकानदारों या किसानों से ही फल खरीदने की सलाह दी है। डॉ. चौधरी के अनुसार, तरबूज में केमिकल या रंग की जांच घर पर ही बेहद आसानी से की जा सकती है। इसके लिए तरबूज का एक छोटा टुकड़ा लेकर उसे गुनगुने पानी में डालें। अगर पानी का रंग तुरंत लाल हो जाता है, तो इसका साफ मतलब है कि फल में कृत्रिम रंग या केमिकल का इंजेक्शन लगाया गया है। प्राकृतिक रूप से पके हुए साफ तरबूज से पानी का रंग कभी नहीं बदलता।
किराए की जमीन पर बाहरी राज्यों के किसान कर रहे रसायनों का बेलगाम इस्तेमाल
जानकारों के मुताबिक, जिले में स्थानीय स्तर पर तरबूज और खरबूजे की खेती करने वाले किसान बहुत कम हैं। पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश (UP) और मध्य प्रदेश (MP) जैसे बाहरी राज्यों से आए कुछ काश्तकार यहाँ जमीनें किराए पर लेकर बड़े पैमाने पर कमर्शियल खेती कर रहे हैं। कम समय में ज्यादा से ज्यादा फसल तैयार करने और बाजार से मोटी रकम कमाने के चक्कर में पेस्टीसाइड्स और रसायनों का अंधाधुंध छिड़काव किया जा रहा है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा विभाग ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए झुंझुनूं शहर में करीब 400 किलो मिलावटी तरबूज नष्ट तो करवाए थे, लेकिन कस्बे के भीतरी इलाकों में प्रशासनिक ढिलाई के चलते यह जानलेवा खेल अब भी बदस्तूर जारी है।

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