खुशी हत्याकांड में परिजनों की भूमिका पर उठे कई सवाल
मेरठ। जनपद के भावनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोकुलधाम सोसाइटी में रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा खुशी उर्फ खुशबू की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है। जांच में यह साफ हो गया है कि किशोरी की मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसके सगे पिता और सौतेली मां ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को कस्टडी में लेकर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
नींद में ही घेर लिया, पिता ने चेहरे पर दबाया तकिया
थाना प्रभारी जोगेंद्र सिंह सैनी ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बेहद चौंकाने वाली बातें बताई हैं। दोनों पिछले 72 घंटों से छात्रा को रास्ते से हटाने का मौका ढूंढ रहे थे। आरोपी पिता कपिल एक डेयरी प्लांट (दुग्ध संयंत्र) में नौकरी करता है। सोमवार की रात वह नाइट ड्यूटी पर गया था और मंगलवार तड़के जब वह वापस लौटा, तो उसने देखा कि सोसाइटी का गार्ड गहरी नींद में है। इसे सही मौका मानकर वह सीधे घर के भीतर गया और अपनी दूसरी पत्नी पिंकी के साथ मिलकर बेटी के कमरे में दाखिल हुआ। सोते समय पिंकी ने खुशी के दोनों पैर कसकर पकड़ लिए और कपिल ने उसके चेहरे व गले पर तब तक तकिया दबाए रखा, जब तक कि उसकी सांसें पूरी तरह थम नहीं गईं।
साजिश के तहत चुपचाप कर दिया अंतिम संस्कार
वारदात को अंजाम देने के बाद शातिर दंपती ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की पूरी तैयारी कर ली थी। वे खुशी के शव को अपनी गाड़ी में डालकर जागृति विहार स्थित उसके दादा के निवास स्थान पर ले गए। वहां उन्होंने अन्य रिश्तेदारों को गुमराह करते हुए शव का आनन-फानन में अंतिम संस्कार भी करवा दिया। पुलिस की तफ्तीश में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि करीब चार साल पहले जब सौतेली मां पिंकी ने एक बेटी को जन्म दिया, उसके बाद से ही घर में खुशी के साथ गंभीर रूप से भेदभाव और प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया था।
ननिहाल वालों को पहले ही था अनहोनी का डर, फोन छीन लेते थे आरोपी
मृतका के मामा भूपेंद्र शर्मा और अन्य ननिहाल पक्ष के लोगों ने बताया कि खुशी को अपनी जान का खतरा होने का आभास बहुत पहले से था। उसने अपनी मौसी और करीबियों से बातचीत में डर जताया था कि उसके माता-पिता उसे मार सकते हैं। मामा का आरोप है कि आरोपी उसे मायके वालों से बात करने के लिए फोन तक नहीं छूने देते थे। वहीं, खुद को बचाने के लिए हत्यारा पिता पुलिस के सामने लगातार अपनी बेटी के चरित्र पर झूठे कीचड़ उछालता रहा और मोबाइल पर ज्यादा बात करने को घरेलू विवाद की वजह बताता रहा।
जागृति विहार में ननिहाल पक्ष का प्रदर्शन, पुरानी मौत पर भी उठे सवाल
खुशी की हत्या की खबर मिलते ही उसके नाना-नानी और मामा पक्ष के लोग जागृति विहार स्थित घर पहुंचे, जहां आरोपियों के परिजनों ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की, जिसके बाद वहां भारी हंगामा खड़ा हो गया। मृतका के मामा ने एक और संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2017 में खुशी की सगी मां प्रीति की जो रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई थी, वह भी कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या ही थी, जिसकी नए सिरे से जांच होनी चाहिए।
वारदात में इस्तेमाल तकिया जब्त, साक्ष्य मजबूत
ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP Rural) अभिजीत कुमार ने आधिकारिक बयान में कहा कि दोनों नामजद आरोपियों ने अपना अपराध पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। पुलिस की फॉरेंसिक और क्राइम टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर वारदात में इस्तेमाल किए गए मुख्य साक्ष्य (तकिए) को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस अदालत में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए अन्य वैज्ञानिक और चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज कर रही है।

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