ड्रग तस्करों के खिलाफ सीबीएन का सर्जिकल स्ट्राइक: बंद पड़े मकान से मिली 3.6 किलो से ज्यादा एमडी ड्रग्स, नार्को-सिंडिकेट में हड़कंप
झालावाड़ | नशे के काले कारोबार और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीएन और भवानीमंडी सेल की संयुक्त विंग ने बीती रात पचपहाड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले गुराड़िया जोगा गांव में एक सुनसान मकान पर सुनियोजित तरीके से छापा मारा। इस छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित एमडी (MD) ड्रग्स और एक संदिग्ध रासायनिक पाउडर बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
बंद मकान का ताला तोड़कर तलाशी, भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के उच्च अधिकारियों को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला था कि गुराड़िया जोगा गांव का एक स्थानीय निवासी अपने घर के भीतर भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स का स्टॉक छिपाकर रखे हुए है, जिसे वह अंतरराज्यीय स्तर पर सप्लाई करने की फिराक में है। सूचना मिलते ही भवानीमंडी सेल और सीबीएन की टीम ने संयुक्त चक्रव्यूह रचा और रात के अंधेरे में लक्षित मकान की घेराबंदी की। शुरुआत में तस्कर का यह घर बाहर से बंद पाया गया, लेकिन जांच दल ने बिना वक्त गंवाए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए घर का ताला तोड़ा। सघन तलाशी के दौरान घर के गुप्त कोनों से 3.641 किलोग्राम एमडी ड्रग्स और 7.060 किलोग्राम संदिग्ध पाउडर बरामद हुआ।
लैब भेजे गए संदिग्ध पाउडर के सैंपल, एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
मौके से मिले संदिग्ध रासायनिक पाउडर की असल प्रकृति का पता लगाने के लिए सीबीएन ने उसके नमूने (सैंपल्स) सील कर फॉरेंसिक जांच प्रयोगशाला में भेज दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वह कौन सा नशीला पदार्थ है। केंद्रीय एजेंसी ने बरामद की गई पूरी खेप को अपने कब्जे में लेते हुए अज्ञात व नामजद आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल फरार मकान मालिक और इस अवैध धंधे को संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के नेटवर्क से जुड़े तार, सप्लायरों की तलाश तेज
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह इलाका मध्य प्रदेश (MP) की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर अक्सर स्थानीय तस्कर भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ लेते हैं और वारदात या तस्करी को अंजाम देकर एमपी के सीमावर्ती जिलों में जाकर छिप जाते हैं। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय ड्रग माफियाओं की रीढ़ तोड़ने के रूप में देखा जा रहा है। नारकोटिक्स ब्यूरो की इंटेलिजेंस विंग अब इस बात का सुराग लगाने में जुटी है कि इतनी भारी तादाद में एमडी ड्रग्स की यह कंसाइनमेंट कहां से मैन्युफैक्चर होकर आई थी और इसे किन-किन शहरों के पब, कॉलेजों या बड़े सप्लायरों तक पहुंचाया जाना था। मामले में आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

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