जाली नोटों के काले साम्राज्य का पर्दाफाश: लाखों रुपए की नकली करेंसी के साथ पकड़ी गई 'हाईटेक' फैक्ट्री, अंतराज्यीय गैंग का खुलासा
दौसा | राजस्थान की दौसा जिला पुलिस ने जाली नोट बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए चार तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से पांच सौ रुपये के मूल्य वाले कुल चौबीस लाख चौरासी हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। इसके साथ ही जाली नोट तैयार करने वाली आधुनिक मशीनें और भारी मात्रा में अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं। इस पूरे मामले में एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया है।
फरीदाबाद और नोएडा से दबोचे गए गिरोह के मुख्य सूत्रधार
पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस की विशेष टीमों ने पड़ोसी राज्य हरियाणा के फरीदाबाद में छापेमारी कर इस पूरे गिरोह के मुख्य मास्टरमाइंड संतोष सिंह वाल्मीकि (उम्र तैंतीस वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। इसके साथ ही उसके मुख्य सहयोगी विशाल उपाध्याय (उम्र बयालीस वर्ष) को भी दबोचा गया है, जो झारखंड का निवासी है और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के नोएडा में रह रहा था।
दौसा में चालीस हजार की जाली करेंसी के साथ पकड़ा गया था पहला मोहरा
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब शुरू हुआ जब बीते अट्ठाइस मई को स्थानीय कोतवाली थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बीड़ की ढाणी निवासी उन्नीस वर्षीय आयुष कुमार मीणा को चालीस हजार रुपये के नकली नोटों के साथ रंगे हाथों दबोचा था। आयुष से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो इस काले कारोबार में एक बाल अपचारी (नाबालिग) की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस नाबालिग को भी अपनी कस्टडी में लिया, जिसके पास से सैंतालीस हजार रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे।
प्रिंटर, लैपटॉप और केमिकल समेत नोट छापने का पूरा कारखाना जब्त
स्थानीय स्तर पर पकड़े गए आरोपियों से मिली गुप्त जानकारियों और तकनीकी इनपुट के आधार पर दौसा पुलिस ने फरीदाबाद के ठिकाने पर योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। वहां से मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही नोट छापने की पूरी अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने मौके से ग्यारह प्रिंटर, दो लैपटॉप, छह पेपर रोल, दो डिब्बे विशेष केमिकल, वॉटरमार्क बनाने वाली डाई, कटर और ब्रश जैसी सामग्रियां जब्त की हैं। अदालत ने पकड़े गए तीनों मुख्य आरोपियों को सात दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जिनसे अब इस जाली नोट नेटवर्क की सप्लाई चेन और अन्य मददगारों के बारे में गहन पूछताछ की जा रही है।

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