अग्निकांड हादसों के बाद दिल्ली सरकार का कड़ा एक्शन: अवैध निर्माण पर जेल का प्रावधान, डीएम संभालेंगे कमान
नई दिल्ली | देश की राजधानी में अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक शिथिलता के कारण हुए हालिया हादसों के बाद दिल्ली सरकार पूरी तरह सख्त रुख अपना चुकी है। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई कड़े फैसले लिए गए। बैठक के बाद गृह मंत्री आशीष सूद ने मीडिया को महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बेहद सख्त कदम उठा रही है।
लापरवाही बरतने वालों पर कड़ा शिकंजा
गृह मंत्री आशीष सूद ने प्रेस वार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं को अत्यंत गंभीरता से लिया है और सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के हर नागरिक को एक सुरक्षित माहौल देना है, जिसके लिए अवैध निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से सख्ती बढ़ाई जा रही है।
प्रशासनिक समन्वय और जिलाधिकारियों को अधिक अधिकार
विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने अब सभी संबंधित एजेंसियों को एक एकीकृत व्यवस्था के तहत काम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही, कानून व्यवस्था और नियमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की शक्तियों का दायरा बढ़ाया जाएगा। अब डीएम को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अवैध निर्माणों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले परिसरों पर सीधी और कड़ी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार होगा।
आपदा प्रबंधन कानून के तहत जेल का प्रावधान
सरकार अब राजधानी में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट) के प्रावधानों को पूरी सख्ती के साथ धरातल पर उतारेगी। गृह मंत्री ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों और सुरक्षा पैमानों की अवहेलना करने वाले मकान मालिकों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों के खिलाफ गंभीर कानूनी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। नियमों को ताक पर रखने वालों को दो साल तक की कैद भुगतनी पड़ सकती है। इसके अलावा, यदि इस पूरे मामले में किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता या लापरवाही पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच के साथ-साथ जेल और जुर्माने जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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