सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर: रेल मंत्री ने दी पश्चिम बंगाल को 1 लाख करोड़ के रेल पैकेज की सौगात
सिलीगुड़ी | पश्चिम बंगाल के प्रवास पर आए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने साझा किया कि केंद्र सरकार दिल्ली से वाराणसी और पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन संचालित करने की योजना पर गंभीरता से काम कर रही है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद देश की राजधानी से सिलीगुड़ी तक का सफर मात्र छह घंटे में तय किया जा सकेगा। रेल मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रांतीय रेल तंत्र के आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
अमृत भारत स्टेशनों का जाल और वंदे भारत का विस्तार
प्रशासनिक रूपरेखा के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के अंतर्गत 102 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा, जिनमें से 10 स्टेशनों पर आधुनिक सुविधाओं का कार्य संपन्न भी हो चुका है। वर्तमान में राज्य के विभिन्न मार्गों पर 9 वंदे भारत एक्सप्रेस और 13 अमृत भारत ट्रेनें यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। इसके साथ ही देश की पहली वंदे भारत स्लीपर श्रेणी की सेवा को भी सर्वप्रथम इसी राज्य से हरी झंडी दिखाई गई थी, जो इसकी रणनीतिक महत्ता को दर्शाता है।
मेट्रो अपग्रेडेशन और फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण
कोलकाता के शहरी परिवहन को सुगम बनाने के लिए रेल मंत्रालय ने मेट्रो नेटवर्क के आधुनिकीकरण का खाका खींचा है, जिसके तहत शहर में 60 अत्याधुनिक 'नेक्स्ट जेनरेशन' मेट्रो ट्रेनें शामिल की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, वाणिज्यिक माल ढुलाई को सुचारू और तीव्र बनाने के उद्देश्य से डानकुनी से सूरत के मध्य एक पूर्व-पश्चिम समर्पित फ्रेट कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में रेलवे लाइनों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा चुका है।
केंद्रीय बजटीय आवंटन में वृद्धि और नीतिगत सुधार
परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा करते हुए बताया गया कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के कार्यकाल के दौरान राज्य को रेलवे विकास के लिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का वार्षिक बजटीय सहयोग मिलता था, जो वर्तमान शासनकाल में बढ़कर 14,205 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पहले प्रांतीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जैसी प्रशासनिक बाधाओं के कारण कई कार्य प्रभावित हुए थे, लेकिन अब इन नीतिगत अड़चनों को दूर कर लिया गया है जिससे निर्माण कार्यों में अभूतपूर्व तेजी आने की उम्मीद है।

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