भ्रष्टाचार पर शिकंजा, मंत्री किरोड़ीलाल के छापेमारों के ठिकानों से मिला बड़ा खजाना
जयपुर। राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीना द्वारा नकली खाद-बीज निर्माताओं के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगे हैं। इस अभियान की छापामार टीम में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी खुद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के राडार पर आ गए हैं। एसीबी ने राजस्थान राज्य बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 2.44 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की है। शुरुआती जांच के मुताबिक, गजराज ब्रांड के मूंगफली बीजों पर हुई कार्रवाई को दबाने और सीज किए गए माल को दोबारा बाजार में भेजने के नाम पर करोड़ों रुपये की घूस ली गई थी। एसीबी ने लूणकरणसर में एक बस की तलाशी के दौरान निदेशक के रिश्तेदार को भारी नकदी के साथ दबोचा, जो इस रकम को श्रीगंगानगर ले जा रहा था। इसके बाद निदेशक के ठिकानों से भी नकदी बरामद की गई। फिलहाल, बीज निगम के निदेशक और संबंधित कंपनी संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है कि लैब टेस्ट में सैंपल पास कराने और बिक्री दोबारा शुरू कराने के खेल में कौन-कौन शामिल था।
अभियान के आंकड़े और एसीबी का शिकंजा
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के मार्गदर्शन में प्रदेश भर में नकली खाद-बीज के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही थी। इस मुहिम के तहत अब तक विभिन्न इलाकों में कुल 107 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 765 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, अनियमितताएं मिलने पर 169 डीलरों के लाइसेंस निलंबित और 46 के परमिट पूरी तरह रद्द किए जा चुके हैं, जिनमें किशनगढ़ और अजमेर की 13 फर्में भी शामिल हैं। हालांकि, इसी अभियान की कमान संभाल रहे बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई पर भ्रष्टाचार की इस बड़ी गाज ने इस पूरी प्रशासनिक मुहिम को एक अलग मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है और इसकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भ्रष्टाचार के मामले पर गरमाई सूबे की सियासत
इस बड़े खुलासे के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है और विपक्ष ने सत्तापक्ष को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'भ्रष्टाचार का नया मॉडल' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले तो निष्पक्ष जांच के नाम पर बीज कंपनियों पर धड़ाधड़ छापेमारी करती है, और फिर पर्दे के पीछे से अपने चहेते अधिकारियों को भेजकर उन कारोबारियों से करोड़ों रुपये की मोटी वसूली करवाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इसी वसूली नीति को 'जीरो टॉलरेंस' कहा जाता है।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांगा पूरे मामले पर जवाब
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि रिश्वत के आरोप में पकड़े गए निदेशक और उनके करीबी लोग साफ तौर पर कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में सीधे तौर पर शामिल थे। जूली ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि सरकार को जनता के सामने यह साफ करना चाहिए कि राज्य में चल रही यह छापेमारी असल में मिलावटखोरी को रोकने के लिए थी या फिर व्यापारियों से धन उगाही का एक सुनियोजित जरिया थी। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार को इस भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की पूरी श्रृंखला का पर्दाफाश करना चाहिए कि इसके तार ऊपर और कहां तक जुड़े हैं।

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