अधिकमास में नाथद्वारा में भक्ति का अद्भुत नजारा, श्रीजी के दिव्य मनोरथ संपन्न
राजसमंद। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के सर्वोपरि तीर्थस्थल प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में अधिकमास के पावन उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी में रविवार को ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी पर ग्रीष्मकालीन (ऊष्णकालीन) सेवा के अत्यंत मनोहारी मनोरथ संपन्न हुए। पीठाधीश गोस्वामी तिलकायत राकेश महाराज की पावन स्वीकृति और युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के कुशल निर्देशन में निज मंदिर में प्रभु श्रीनाथजी के सम्मुख ‘छूटत फुहारे आगे निके’ तथा श्री नवनीत प्रियाजी के मंदिर में ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ नामक विशेष लीलाओं के दिव्य दर्शन सजाए गए, जिन्हें देखकर भक्त भावविभोर हो उठे।
चंदन के बंगले में चीरहरण लीला और यमुनाजी का सजीव चित्रण
रविवार को मुख्य राजभोग दर्शन के समय प्रभु श्रीनाथजी को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से निर्मित चंदन के कलात्मक बंगले में प्रतिष्ठित किया गया। इस दौरान द्वापर युग की प्रसिद्ध चीरहरण लीला का बेहद सजीव और भावपूर्ण चित्रण मंदिर परिसर में उतारा गया। इसके लिए मणि कोठे के भीतर यमुनाजी के पावन स्वरूप को दर्शाने के लिए जल भरा गया, जिसमें चांदी और लकड़ी से बनी गोपियों (सखियों) की प्रतिमाओं के साथ-साथ कृत्रिम पेड़-पौधों को इस खूबसूरती से सजाया गया कि संपूर्ण वातावरण ब्रज के वास्तविक घाट जैसा जीवंत प्रतीत होने लगा।
शरबती मलमल की पोशाक और पुष्पों से महका लाडले लाल का पालना
तीव्र गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए इस ऊष्णकालीन सेवा पद्धति के तहत ठाकुरजी को अत्यंत हल्के शरबती मलमल के वस्त्र धारण कराए गए। साथ ही प्रभु का मनमोहक शृंगार करते हुए उन्हें शीतल मोतियों के आभूषणों और ताजे सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। इसी समय श्री लाडले लाल प्रभु के मंदिर में भी राजभोग के दौरान फूलों से महकता हुआ एक अद्भुत पालना सजाया गया, जिसमें प्रियाजी (श्री राधाजी) के विग्रह को विराजित कर झुलाने का दिव्य मनोरथ पूर्ण किया गया।
सायंकाल में छूटे रंग-बिरंगे फव्वारे और चांदी की हटड़ी में सजी पुष्प सांझी
दिन ढलने के बाद सायंकालीन आरती और उत्थापन के दर्शनों में प्रभु श्रीनाथजी को पुनः चंदन के बंगले में पधराकर फव्वारों का मनोरथ किया गया, जहां शीतल जल की फुहारों के बीच ठाकुरजी ने दर्शन दिए। मंदिर के भीतर रंग-बिरंगे फूल-पत्तियों, कलात्मक रंगोली तथा हाथी, घोड़े और बतखों की सुंदर झांकियों ने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर तिलकायत राकेश महाराज, युवाचार्य विशाल बावा और लाल बावा साहब ने स्वयं उपस्थित होकर प्रभु की लाड़-लड़ाने की सेवा की। दूसरी ओर, श्री नवनीत प्रियाजी मंदिर के मोती महल में चांदी की हटड़ी (छोटा मंडप) के भीतर प्रभु के समक्ष गेंदे और मोगरे के फूलों से भव्य सांझी बनाई गई, जिसमें चांदी की सखियां, गौमाताएं और कई तरह के खिलौने सजाए गए थे।

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