56 करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, MP कनेक्शन की जांच तेज
भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में खाकी ने नशीले पदार्थों के काले कारोबार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए एक अवैध एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) कारखाने का भंडाफोड़ किया है। बिजौलिया थाना इलाके के चंपापुर गांव के नजदीक बीहड़ों से घिरे एक आधे बने मकान में चल रहे इस कारखाने से लगभग 56 करोड़ रुपये की कीमत की ड्रग्स और नशीला रसायन जब्त किया गया है। पुलिस ने जाल बिछाकर मौके से तीन धंधेबाजों को दबोच लिया है।
सुरक्षा एजेंसियों को सटीक इनपुट मिला था कि चंपापुर के पास एक सुनसान निर्माणाधीन इमारत के भीतर गुपचुप तरीके से एमडी ड्रग्स पकाने का खेल चल रहा है। इस इनपुट की पुष्टि होते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारस जैन, डीएसपी योगेश शर्मा और बिजौलिया थाना प्रभारी स्वागत पांड्या की अगुवाई में एक स्पेशल टास्क फोर्स ने वहां अचानक धावा बोल दिया। जब टीम भीतर दाखिल हुई तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई, जहां बड़े स्तर पर जहरीला नशा तैयार किया जा रहा था।
करोड़ों की तैयार खेप और केमिकल जब्त
तलाशी के दौरान मौके से 36 किलोग्राम पूरी तरह से तैयार एमडी ड्रग्स बरामद की गई है, जिसकी ग्लोबल मार्केट में कीमत करीब 36 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाला 20 करोड़ रुपये का कच्चा माल (रॉ मैटेरियल) और अन्य घातक रसायन भी बरामद किए गए हैं। इस अवैध यूनिट में बड़े-बड़े जार, प्लास्टिक ड्रम, परात और कई तरह के केमिकल इंस्ट्रूमेंट्स की मदद से नशा तैयार हो रहा था। तफ्तीश में सामने आया कि पकड़े गए आरोपी करीब 20 किलो और कच्चे माल को प्रोसेस कर भारी मात्रा में नई खेप तैयार करने के अंतिम चरण में थे।
पड़ोसी राज्यों से जुड़े तस्करों के तार
पुलिस ने घेराबंदी कर जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें मध्य प्रदेश के मंदसौर का रहने वाला वीरेंद्र (51), नीमच का बहादुर सिंह (43) और भीलवाड़ा के स्थानीय गांव भोपतपुरा का निवासी बबलू (30) शामिल हैं। शुरुआती रिमांड में यह बात सामने आई है कि ये तीनों काफी समय से इस सिंडिकेट को चला रहे थे और इनका ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है।
फॉरेंसिक जांच और बैकवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस
रेड के बाद घटनास्थल को सील कर दिया गया है और वहां मिले सभी केमिकल्स व उपकरणों को कब्जे में ले लिया गया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की एक्सपर्ट टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य और रसायनों के सैंपल कलेक्ट किए हैं। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से तहकीकात कर रही है कि इस पूरी फैक्ट्री को फाइनेंस कौन कर रहा था और यहां बनी ड्रग्स किन-किन राज्यों के तस्कर गिरोहों तक पहुंचाई जा रही थी। अधिकारियों का दावा है कि इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए जल्द ही कुछ और बड़ी धरपकड़ देखने को मिल सकती है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, भीलवाड़ा के इतिहास में मादक पदार्थों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रिकवरी है।

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