साहस और संकल्प की मिसाल बनीं दीपिका गौतम, किलिमंजारो फतह पर मिला सम्मान
भोपाल। अफ्रीका महाद्वीप के सबसे ऊंचे और दुर्गम पर्वत शिखर माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त करने वाली जांबाज महिला पुलिस निरीक्षक दीपिका गौतम ने आज राजधानी भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) पहुंचकर पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना से सौजन्य मुलाकात की। इस गौरवपूर्ण अवसर पर डीजीपी कैलाश मकवाना ने इंस्पेक्टर दीपिका को उनकी इस असाधारण और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के लिए पूरे पुलिस महकमे की तरफ से बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
डीजीपी ने की मुक्तकंठ से प्रशंसा: कहा— यह सफलता महिला शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक
मुलाकात के दौरान महिला अधिकारी के अदम्य साहस की सराहना करते हुए डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि यह ऐतिहासिक सफलता मध्यप्रदेश पुलिस बल की महिला अधिकारियों की अद्वितीय क्षमता, अटूट साहस, दृढ़ संकल्प और कार्य उत्कृष्टता का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने रेखांकित किया कि इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर यह मुकाम हासिल करके न केवल पुलिस विभाग का मान बढ़ाया है, बल्कि प्रदेश की लाखों महिलाओं, युवाओं और समस्त पुलिस बल को बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें कड़ी मेहनत से हासिल करने की एक नई प्रेरणा दी है।
यह कीर्तिमान रचने वाली मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बनीं दीपिका
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, भोपाल मुख्यालय के राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) में पदस्थ इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने बीते 29 मई 2026 को अफ्रीका महाद्वीप की सर्वोच्च बर्फीली चोटी माउंट किलिमंजारो के 'गिल्मैन्स पॉइंट' (5,685 मीटर) पर कदम रखकर भारत के गौरवशाली तिरंगे और मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक ध्वज को पूरी शान से फहराया था। इस बेहद खास अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में वे पूरे भारतवर्ष से प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र प्रतिभागी थीं। इस अद्वितीय कीर्तिमान को अपने नाम दर्ज करने के साथ ही इंस्पेक्टर दीपिका गौतम प्रदेश पुलिस इतिहास की पहली ऐसी महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने तंजानिया में स्थित इस विश्व प्रसिद्ध पर्वत शिखर पर फतह हासिल कर खाकी का गौरव वैश्विक स्तर पर चमकाया है।
हाड़ कंपा देने वाली ठंड और माइनस 15 डिग्री तापमान के बीच पूरा किया मिशन
गौरतलब है कि माउंट किलिमंजारो का यह पर्वतारोहण अभियान पांच दिनों का बेहद जोखिम भरा, चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक कठिन मिशन था। इस मिशन के दौरान इंस्पेक्टर दीपिका को तीन बेहद खतरनाक बेस कैंपों को पार करना पड़ा। समिट के लिए अंतिम और सबसे मुख्य चढ़ाई रात के घने अंधेरे में शुरू की गई थी, जब पहाड़ों पर मौसम सबसे ज्यादा जानलेवा होता है।
चढ़ाई के दौरान वहां का तापमान गिरकर माइनस 10 से माइनस 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और लगातार बर्फीले तूफानों व बदलते मौसम ने आगे बढ़ने की राह को लगभग नामुमकिन बना दिया था। इन तमाम प्राणघातक चुनौतियों और ऑक्सीजन की भारी कमी के बावजूद, इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अपने अदम्य साहस, अद्वितीय धैर्य और फौलादी इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए इस मिशन को फतह कर इतिहास रच दिया।

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