शाही विरासत और भव्य वास्तुकला के कारण पिंक सिटी की है वैश्चिक पहचान
जयपुर । राजस्थान की राजधानी जयपुर की, जिसे पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है। अपनी शाही विरासत और भव्य वास्तुकला के कारण यह शहर वैश्विक पहचान रखता है। जयपुर सिर्फ एक ऐतिहासिक नहीं, बल्कि भारत के सबसे पुराने और योजनाबद्ध शहरों में से एक है। इसकी स्थापना आज से लगभग 300 साल पहले, साल 1727 में दूरदर्शी महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाई थी। शहर को इस तरह से बसाया गया था कि यहां की सड़कें चौड़ी और व्यवस्थित हों, और इसका वास्तुशिल्प कला का अद्भुत नमूना हो। आज भी जयपुर की बसावट और सड़कें लोगों को प्रभावित करती हैं, जो उस समय की इंजीनियरिंग और दूरदर्शिता का प्रमाण है।
यही वजह है कि इसकी तुलना अक्सर पेरिस की सुनियोजित शहरी संरचना से की जाती है। जयपुर को पिंक सिटी कहे जाने के पीछे भी एक खास और दिलचस्प कहानी है। साल 1876 में, प्रिंस ऑफ वेल्स के भव्य स्वागत के लिए तत्कालीन महाराजा राम सिंह ने पूरे शहर को एक मेहमानवाजी के प्रतीक के रूप में गुलाबी रंग से रंगवा दिया था। इसके बाद से ही यह गुलाबी रंग जयपुर की पहचान बन गया। आज भी पुराने शहर की ज्यादातर इमारतें गुलाबी रंग में ही नजर आती हैं, जो इसे बाकी शहरों से बिल्कुल ही अलग और आकर्षक बनाती हैं। यह शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां का हवा महल, आमेर किला, सिटी पैलेस, नाहरगढ़ किला और जंतर-मंतर हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन इमारतों की खूबसूरती और अनोखी बनावट लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है, जो जयपुर को भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बनाती है।
जिस तरह पेरिस को कला और फैशन की राजधानी माना जाता है, उसी तरह जयपुर भी भारत की कला और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां की ब्लू पॉटरी, बंधेज की साड़ियां, कुंदन-मीनाकारी के गहने और हाथ से बने कपड़े देश-विदेश में काफी पसंद किए जाते हैं। सदियों से यह शहर कलाकारों और कुशल कारीगरों का घर रहा है, जहां हस्तकला की समृद्ध परंपरा आज भी जीवित है। जयपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए साल 2019 में यूनेस्को ने इसके परकोटा क्षेत्र (वॉल्ड सिटी) को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था, जो इसकी वैश्विक महत्ता को प्रमाणित करता है।

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