अजीत डोभाल की अगुवाई में BRICS NSA बैठक, आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर चर्चा
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में ब्रिक्स (BRICS) सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की एक बेहद अहम दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की कमान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल संभालेंगे। वैश्विक परिदृश्य पर बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच इस बैठक पर संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं। यह बैठक आगामी सितंबर महीने में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि और रणनीतिक एजेंडा तैयार करने के लिहाज से बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
सीमा पार आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों पर रहेगा मुख्य फोकस
इस द्विवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर उभरते संकटों से निपटना है। विचार-विमर्श के दौरान सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवाद, पश्चिम एशिया में गहराते संकट और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष खड़ी अन्य बड़ी चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच गहन मंथन किया जाएगा। भारत इस कूटनीतिक मंच का उपयोग पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा पोषित और प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने के लिए करेगा। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी हरकतों पर भारत अपना कड़ा और स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रेखांकित करेगा।
चीनी विदेश मंत्री और रूसी सुरक्षा सचिव की उपस्थिति में मनेगी सहमति
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही इस बैठक में वैश्विक महाशक्तियों के प्रतिनिधि भी शिरकत कर रहे हैं। इसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु विशेष रूप से शामिल होने भारत आ रहे हैं। इस बैठक के दौरान नई उभरती अत्याधुनिक तकनीकों के सुरक्षित इस्तेमाल, साइबर अपराधों से निपटने की रणनीति और आतंकवाद विरोधी बहुपक्षीय सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा होगी। हालांकि, विभिन्न भू-राजनीतिक हितों के बीच ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों को एक मंच पर लाकर सर्वसम्मति बनाना भारत के लिए एक कूटनीतिक परीक्षा होगी।
सितंबर शिखर सम्मेलन के लिए तैयार होगा मजबूत रोडमैप
भारतीय कूटनीति के नजरिए से यह बैठक आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' यानी कतई बर्दाश्त न करने की सख्त नीति को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने का एक बड़ा जरिया बनेगी। आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए भारत ब्रिक्स देशों से सामूहिक कार्रवाई की मांग करेगा। दो दिनों तक चलने वाला यह सुरक्षा मंथन सीधे तौर पर सितंबर में आयोजित होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के फैसलों को प्रभावित करेगा। इस बैठक के निष्कर्षों के आधार पर ही राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन का अंतिम घोषणापत्र और सुरक्षा रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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