लखनऊ अग्निकांड की तह तक जाएगी जांच, फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमों ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का मुआयना किया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य और सबूत जुटाने के लिए पूरी तीन मंजिला इमारत को कड़े पहरे के बीच सील कर दिया है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजहों की अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन शुरुआती तकनीकी जांच में यही सामने आया है कि पहली मंजिल के वेयरहाउस में पहले शॉर्ट सर्किट हुआ और फिर एसी (एयर कंडीशनर) का कंप्रेसर फटने से आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
मुख्यमंत्री की हाई-लेवल मीटिंग के बाद 4 अफसर निलंबित, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात लखनऊ में एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई। सीएम ने इस लापरवाही के जिम्मेदार दोषियों को कड़ा सबक सिखाने के लिए तत्काल एसआईटी (SIT) के गठन का हुक्म दिया। इस विशेष जांच दल में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है, जो अगले 7 दिनों में अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे।
प्रथम दृष्ट्या घोर लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। गाज गिरने वाले अफसरों में शामिल हैं:
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गौरव कुमार (अधिशासी अभियंता - एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम)
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कमलेंद्र कुमार सिंह (फायर स्टेशन सेकंड ऑफिसर - एफएसएसओ, फायर विभाग, इंदिरा नगर)
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अनिल कुमार (सहायक अभियंता - एई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
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प्रमोद पांडे (अवर अभियंता - जेई, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
इसके अलावा, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भी अपने स्तर पर एक पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति बनाई है। माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुछ और बड़े अधिकारियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
बिल्डिंग मालिक और संचालक समेत 4 नामजद आरोपी गिरफ्तार, 2 फरार
प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ पुलिसिया कार्रवाई भी बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। पुरनिया पुलिस चौकी के प्रभारी शुभम तिवारी की लिखित शिकायत (तहरीर) पर अलीगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत 6 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
सोमवार देर रात पुलिस की विशेष टीमों ने छापेमारी कर 4 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया, जिनमें शामिल हैं:
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वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (मदेयगंज निवासी, बहुमंजिला इमारत का मुख्य मालिक)
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रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज निवासी, ग्राउंड फ्लोर पर संचालित पेट शॉप का संचालक)
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तूशॉक कृष्णा जायसवाल (बालागंज निवासी, अवैध रूप से चल रहे थ्री-डी एनीमेशन सेंटर का संचालक)
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सुरेश कुमार शाहू (केशवनगर निवासी, पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस का किरायेदार)
इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला फिलहाल फरार चल रहे हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) बबलू कुमार के मुताबिक, इस घटना में शामिल अन्य संदिग्धों और बैक-एंड पर मदद करने वाले लोगों की भूमिका की भी बारिकी से पड़ताल की जा रही है।
भीषण आग की चपेट में आने से 15 मासूमों ने गंवाई जान
उल्लेखनीय है कि सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे अलीगंज के पुरनिया स्थित इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में अचानक आग लग गई थी। ग्राउंड फ्लोर पर पालतू जानवरों की दुकान थी और पहली मंजिल पर उसका गोदाम था, जहां से आग भड़की। ऊपरी मंजिलों यानी दूसरी और तीसरी मंजिल पर एक एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं तक के बच्चों का कोचिंग सेंटर चल रहा था।
आग इतनी तेजी से फैली कि ऊपर पढ़ाई कर रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने करीब दो घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 15 छात्रों के झुलसे हुए शव बाहर निकाले। जान बचाने के लिए खिड़की से नीचे कूदे 9 छात्र गंभीर रूप से चोटिल हैं, जबकि कई अन्य झुलसे हुए बच्चों का इलाज अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।

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