कलेजे के टुकड़ों को खोकर बिलख उठे परिवार, दोस्ती की कहानी ने झकझोरा
कानपुर| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण और कलेजा कंपा देने वाले अग्निकांड की तपिश ने कानपुर शहर के दो आशियानों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले गोविंद नगर निवासी संयम और बर्रा के रहने वाले सूरज की वर्षों पुरानी और अटूट दोस्ती थी। दोनों ने रतनलाल नगर के दून स्कूल से एक साथ अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, अपने सुनहरे भविष्य और करियर के सपने संजोकर एक साथ एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी की शुरुआत की, और अफसोस कि इस भयानक हादसे में दोनों ने एक साथ इस दुनिया को भी अलविदा कह दिया।
परिजनों और चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों दोस्तों की मौत इमारत के भीतर फैले अत्यधिक जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई है। उनके शरीर पूरी तरह काले पड़ चुके थे। आशंका जताई जा रही है कि आग की लपटों और धुएं से खुद को बचाने के लिए दोनों दोस्तों ने खुद को किसी सुरक्षित कमरे या बाथरूम में बंद कर लिया था, जो बाद में उनका काल बन गया। मंगलवार तड़के करीब 5:00 बजे संयम का पार्थिव शरीर गोविंद नगर 11 ब्लॉक स्थित उनके निवास पर पहुंचा और उसके कुछ ही देर बाद सुबह 6:30 बजे सूरज का शव भी बर्रा-7 लाया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
"एक बार तो बोल बेटा..." मां की करुण पुकार से रो पड़ा पूरा मोहल्ला
मंगलवार की सुबह जब संयम का शव उसके घर के चौखट पर लाया गया, तो उसकी मां सोनिया बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी दर्दनाक चीखें वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर रही थीं। वे बार-बार कह रही थीं, "ऐसे कैसे बिना कुछ बताए चला गया बेटा... कुछ तो बोल, तेरी मां तेरी एक आवाज सुनने के लिए तड़प रही है।"
परिजनों ने बताया कि संयम के जीवन को लेकर परिवार के ढेरों अरमान थे। उसके मामा सौरभ दुआ ने रुआंसे गले से कहा कि, "भांजे की बारात निकालने की तैयारियां सोच रखी थीं, क्या पता था कि बारात की जगह उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होना पड़ेगा।"
दादी के 17वें संस्कार के दिन ही उठी पोते की अर्थी
संयम के परिवार पर दुखों का यह पहाड़ बेहद अजीब और दर्दनाक समय पर टूटा है। महज 17 दिन पहले ही संयम की दादी ऊषा रानी का स्वर्गवास हुआ था और मंगलवार को ही उनका सत्रहवां संस्कार संपन्न होना था। संयम ने परिवार को वचन दिया था कि वह मंगलवार की सुबह की ट्रेन से इस संस्कार में शामिल होने के लिए कानपुर पहुंचेगा। लेकिन सुबह उसकी जगह जब उसका शव घर आया, तो पूरे मोहल्ले का कलेजा फट गया। बर्रा-2 स्थित स्वर्गाश्रम घाट पर गमगीन माहौल में संयम का अंतिम संस्कार किया गया।
मां से कहा था— 'घर पहुंच गया हूं, ख्याल रखना', कुछ घंटों बाद आया शव
दूसरी तरफ, बर्रा-7 में सोमवार की पूरी रात सूरज की मां मीरा को इस अनहोनी की भनक तक नहीं लगने दी गई थी। परिजनों ने उन्हें ढांढस बंधाने के लिए कह रखा था कि सूरज सिर्फ मामूली रूप से जख्मी है और उसे इलाज के लिए अस्पताल से घर लाया जा रहा है। लेकिन जैसे ही सुबह गाड़ी से सूरज का शव नीचे उतारा गया, मां बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
वे रोते हुए चिल्लाने लगीं, "तूने तो कल ही फोन पर कहा था कि मैं बस घर पहुंचने वाला हूं, तुम अपना ख्याल रखना... अब तेरे बिना मेरा ख्याल कौन रखेगा।" सूरज के मामा जितेंद्र ने बताया कि सूरज अभी दो दिन पहले ही अपनी शादी के लिए लड़की देखने शहर आया था। तीन साल पहले एक पेट्रोल पंप हादसे में पिता शिवराम सिंह की मौत के बाद पूरे घर, छोटी बहन सौम्या और भाई सम्राट की जिम्मेदारी अकेले सूरज के ही कंधों पर थी। दोपहर में जब उसका छोटा भाई ऋषिकेश से कानपुर पहुंचा, तब भैरव घाट पर सूरज का अंतिम संस्कार किया गया।
शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने से भड़की थी आग, 15 छात्रों की मौत
यह पूरी त्रासदी लखनऊ के अलीगंज स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग के कारण हुई। इस दर्दनाक हादसे में एनीमेशन और कोचिंग करने वाले कुल 15 छात्र-छात्राओं की जलने और दम घुटने से असमय मौत हो गई, जबकि 9 से अधिक छात्र गंभीर रूप से झुलस गए और खिड़कियों से कूदने के कारण चोटिल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।
| अलीगंज बिल्डिंग का लेआउट और घटनाक्रम | विवरण |
| ग्राउंड फ्लोर (भूतल) | पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) संचालित थी। |
| प्रथम तल (First Floor) | पेट शॉप मालिक का मुख्य वेयरहाउस (गोदाम) था। |
| द्वितीय व तृतीय तल | 3D एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और 12वीं की कोचिंग। |
| आग का कारण और समय | दोपहर करीब 2:30 बजे वेयरहाउस में शॉर्ट सर्किट के बाद एसी का कंप्रेसर फटा। |
दमकल और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, वेयरहाउस में लगी आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी सीढ़ी को धुएं की चपेट में ले लिया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर पढ़ रहे छात्रों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल सका। करीब दो घंटे तक चले एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद खिड़कियां काटकर 15 शवों को बाहर निकाला जा सका।
दौरा छोड़ मौके पर पहुंचे सीएम योगी; मृतकों को 7-7 लाख रुपये का मुआवजा
हादसे की भयावहता की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ का वीआईपी दौरा बीच में ही रद्द कर तुरंत लखनऊ वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली से तत्काल लखनऊ पहुंचकर अस्पताल में भर्ती घायल बच्चों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर गृह सचिव और डीजीपी सहित तमाम आला अधिकारियों की विशेष टीम आग के तकनीकी कारणों की जांच कर रही है।
इस राष्ट्रीय त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की तरफ से मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के शोकाकुल परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज के साथ 50-50 हजार रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

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