अद्भुत आस्था! 850 किमी कनक दंडवत यात्रा पर निकले तपस्वी संत
सीकर (दांतारामगढ़):आस्था, अटूट विश्वास और कठिन साधना की एक ऐसी मिसाल राजस्थान के सीकर जिले से सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। जिले की दांतारामगढ़ तहसील के बाय गांव के प्रसिद्ध संत शंकर दास महाराज, जिन्हें श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से 'खड़ेश्वर बाबा' के नाम से पुकारते हैं, ने एक बेहद कठिन संकल्प लिया है। मानव कल्याण, गौ संरक्षण और विश्व शांति का संदेश लेकर बाबा ने विशेष अनुष्ठान के बाद माता वैष्णो देवी धाम तक की बेहद मुश्किल 'कनक दंडवत' यात्रा शुरू कर दी है। करीब 850 किलोमीटर लंबी इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बाय गांव स्थित उनके आश्रम से हुई।
सड़क पर बिछते हैं गद्दे, दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहे 75 वर्षीय बाबा
75 साल की उम्र में भी खड़ेश्वर बाबा का हौसला और भक्ति देखते ही बनती है। वे इस भीषण गर्मी और कठिन रास्तों पर जमीन पर लेटकर दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। बाबा की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए उनके साथ चल रहे ग्रामीण सड़क पर लगातार गद्दे बिछाते जाते हैं, जिन पर लेटकर बाबा हर एक दंडवत पूरा करते हैं और आगे कदम बढ़ाते हैं। बाबा अपने साथ लाल कपड़े में बंधा एक पवित्र नारियल भी लेकर चल रहे हैं, जिसे वे कटरा स्थित माता वैष्णो देवी के मुख्य दरबार में अर्पित करेंगे।
कोई समय-सीमा तय नहीं, रास्ते भर करेंगे सनातन का प्रचार
खड़ेश्वर बाबा के मुताबिक, इस बेहद कठिन यात्रा को पूरा करने की कोई निश्चित समय-सीमा (टाइम लिमिट) तय नहीं है। यात्रा के दौरान वे खाटूश्यामजी सहित रास्ते में आने वाले सभी प्रमुख मंदिरों और सिद्धपीठों के दर्शन-पूजन करते हुए आगे बढ़ेंगे। राजस्थान से शुरू होकर हरियाणा और पंजाब के रास्ते जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने वाली इस यात्रा में वे जगह-जगह भजन-कीर्तन के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं।
अद्भुत साधना: पिछले 22 वर्षों से न बैठे हैं, न लेटे हैं
स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की मानें तो खड़ेश्वर बाबा की तपस्या सामान्य इंसानों की सोच से परे है। वे पिछले 22 वर्षों से बिना बैठे और बिना लेटे, लगातार खड़े रहकर ही अपनी कठिन साधना कर रहे हैं। यहाँ तक कि रात में विश्राम या सोते समय भी वे एक विशेष झूलेनुमा सहारे के जरिए खड़े-खड़े ही आराम करते हैं। यही वजह है कि उनकी यह कठिन तपस्या और चमत्कारी आस्था पूरे क्षेत्र में गहरी श्रद्धा और कौतूहल का विषय बनी हुई है।

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