एमपी ट्रांसको ने बढ़ाई सुरक्षा, हर सब स्टेशन पर लगेंगे हाईटेक CCTV कैमरे
जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति के मुख्य केंद्रों यानी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा तकनीकी अभियान शुरू किया गया है। राज्य भर के 417 सबस्टेशनों की निगरानी को मजबूत करने के लिए प्रशासन करीब 8.15 करोड़ रुपये के बजट से अत्याधुनिक हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर रहा है। सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य विद्युत ग्रिड को चोरी की वारदातों और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। इससे पहले भी विभाग ने बिजली लाइनों की देखरेख के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया था। अब कैमरों के इस नए नेटवर्क से सबस्टेशनों की सुरक्षा में इंसानी पहरे के साथ-साथ तकनीक का एक दोहरा सुरक्षा कवच तैयार हो जाएगा। इससे ट्रांसफॉर्मरों के कीमती सामानों की चोरी थमेगी और आम लोगों को बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रहेगी।
कॉपर स्ट्रिप चोरी रोकने और ट्रांसफॉर्मर बचाने की कवायद
अक्सर देखा गया है कि सबस्टेशनों से ट्रांसफॉर्मर की कॉपर न्यूट्रल स्ट्रिप चोरी हो जाती है, जिससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था भी ठप पड़ जाती है। ये स्ट्रिप्स ट्रांसफॉर्मर को सुरक्षित चलाने के लिए बेहद जरूरी होती हैं और इनके गायब होने से ट्रांसफॉर्मर के जलने की नौबत आ जाती है। एक बार यदि बड़ा ट्रांसफॉर्मर खराब हो जाए, तो उसे ठीक करने या बदलने में तीन से चार महीने का समय लग जाता है, जिसका सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए लगाए जा रहे ये नए कैमरे 360 डिग्री घूमने की क्षमता, नाइट विजन और मोशन डिटेक्शन (हलचल भांपने की तकनीक) से लैस हैं, जो घने अंधेरे में भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ लेंगे।
सीधे मोबाइल पर मिलेगी लाइव फीड, शक्तिभवन से होगी मॉनिटरिंग
इस पूरी व्यवस्था को इतना आधुनिक बनाया गया है कि सभी कैमरों का सीधा प्रसारण संबंधित सबस्टेशन के प्रभारियों के मोबाइल फोन पर हर वक्त उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की मदद से जबलपुर स्थित शक्तिभवन के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (सेंट्रल कंट्रोल रूम) से मध्य प्रदेश के सभी 417 सबस्टेशनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यालय से एक क्लिक पर पूरे राज्य की स्थिति दिखने से सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और गड़बड़ियों पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा। जबलपुर में इसका सफल ट्रायल किया जा चुका है और अब इसे पूरे प्रदेश में अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है ताकि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया जा सके।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा प्रदेश का बिजली ढांचा
इस बड़े तकनीकी बदलाव के बाद बिजली विभाग किसी भी आपातकालीन स्थिति या तकनीकी खराबी का तुरंत पता लगाने में सक्षम होगा। पहले जहां सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल सुरक्षाकर्मियों पर होती थी, वहीं अब इस डिजिटल पहरे से निगरानी का दायरा कई गुना बढ़ गया है। यह नई प्रणाली केवल चोरी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सबस्टेशनों के रोजमर्रा के कामकाज में भी बड़ा सुधार आएगा। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी इस परियोजना के माध्यम से राज्य के उपभोक्ताओं को सुरक्षित और लगातार बिजली देने के अपने वादे को पूरा कर रही है, जो प्रदेश के पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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