स्नान से पहले भगवान शिव का करें स्मरण और ॐ नमः शिवाय जाप, मिलती हैं मानसिक शांति, सकारात्मक उर्जा का होगा संचार
सनातन परंपरा में स्नान केवल शरीर की सफाई का माध्यम नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का भी महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि दिन की शुरुआत ईश्वर के स्मरण के साथ की जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे दिन की ऊर्जा और मानसिक स्थिति पर पड़ता है. बता दें कि विशेष रूप से भगवान शिव का ध्यान करते हुए स्नान करने की परंपरा को अत्यंत शुभ माना गया है. दरअसल मान्यता है कि यह छोटा-सा धार्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ मानसिक शांति और आत्मबल भी बढ़ाने में सहायक हो सकता है.
नियमित शिव की उपासना से मिलती है सुख शांति
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि भगवान शिव को भोलेनाथ और भोला भंडारी के नाम से भी जाना जाता है. वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं. यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से स्नान से पहले श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करता है, तो उसके जीवन में आने वाली अनेक परेशानियों का समाधान मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उपाय विशेष रूप से चंद्रमा की शुभता को बढ़ाने वाला माना जाता है.
उन्होंने बताया कि स्नान से पहले दोनों हथेलियों में स्वच्छ जल भरें, आंखें बंद करके भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित हो रही पवित्र गंगा का ध्यान करें और मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.इस सरल प्रक्रिया को प्रतिदिन करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है. उन्होंने कहा कि शिव की जटाओं में विराजमान मां गंगा का स्मरण पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना गया है.
चंद्रमा कमजोर होने पर दिखने लगते हैं लक्षण
वहीं पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता और मानसिक स्थिरता का कारक ग्रह माना जाता है. जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, तो उसका प्रभाव दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है. ऐसे लोगों में बिना किसी विशेष कारण के चिड़चिड़ापन, उदासी, आत्मविश्वास की कमी और छोटी-छोटी बातों पर अधिक चिंता करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि कई बार निर्णय लेने में कठिनाई, भय की भावना और मानसिक तनाव भी इसी कारण उत्पन्न होते हैं. उन्होंने बताया कि कमजोर चंद्रमा का प्रभाव केवल व्यक्ति के मन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि माता के स्वास्थ्य और उनके साथ संबंधों पर भी असर डाल सकता है.
लगातार मानसिक तनाव के कारण नींद न आने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. ऐसे में नियमित पूजा-पाठ, सकारात्मक सोच, भगवान शिव का स्मरण और सात्विक जीवनशैली अपनाने से मानसिक मजबूती और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है. वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिन की शुरुआत भगवान शिव के स्मरण और सकारात्मक संकल्प के साथ करने से व्यक्ति अपने कार्यों में अधिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और मानसिक शांति का अनुभव कर सकता है. हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक आस्था है और इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए.

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