बलरामपुर में किसानों का प्रदर्शन, फर्जी कर्ज हटाकर धान भुगतान की उठाई मांग
बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के बाद भी मेहनत की कमाई (धान का भुगतान) न मिलने से आक्रोशित किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। रामचंद्रपुर विकासखंड के लगभग 50 से अधिक पीड़ित किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जिला प्रशासन के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया और अपनी लंबित राशि तत्काल जारी करने की गुहार लगाई। किसानों का साफ कहना है कि धान बेचने के महीनों बाद भी उन्हें एक रुपया नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बिना जानकारी के बना दिया 'कर्जदार', खाते हुए होल्ड
कलेक्ट्रेट घेराव करने पहुंचे किसानों ने स्थानीय सहकारी बैंक पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि उनके नाम पर उनकी बिना मर्जी और जानकारी के बैंक से मोटी रकम का कृषि ऋण (लोन) स्वीकृत कर दिया गया। जब धान बिक्री की राशि उनके खातों में आने का वक्त आया, तो इस कथित लोन के चलते प्रशासन ने उनके बैंक खातों को 'होल्ड' (लेन-देन पर रोक) कर दिया। किसानों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी बैंक से कोई कृषि लोन नहीं लिया था, इसके बावजूद उन्हें कागजों पर फर्जी कर्जदार बना दिया गया।
हैरान करने वाला खुलासा: जेल में बंद किसान के नाम पर भी बांट दिया लोन
घोटाले की पराकाष्ठा:
किसानों ने इस फर्जीवाड़े का एक और चौंकाने वाला सबूत प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि यह घोटाला इस कदर बेखौफ तरीके से अंजाम दिया गया कि एक ऐसे किसान के नाम पर भी लोन राशि जारी कर दी गई, जो उस लोन स्वीकृति की अवधि के दौरान जेल की सलाखों के पीछे बंद था। किसानों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कई बार लिखित शिकायत करने के बाद भी इस रैकेट में शामिल दोषी बैंक कर्मियों या बिचौलियों पर अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन ने दिया निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा
प्रदर्शनकारी किसानों से चर्चा करने और उनका गुस्सा शांत करने के लिए अतिरिक्त तहसीलदार जितेंद्र डहरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम तैयार किया गया ज्ञापन स्वीकार किया और भरोसा दिलाया कि इसे पूरी संवेदनशीलता के साथ राज्य सरकार तक भेजा जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इस फर्जी लोन प्रकरण की शुरुआती जांच पहले ही कराई जा चुकी है। जांच की इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संबंधित संदिग्ध खातों को अस्थाई रूप से होल्ड किया गया था ताकि सरकारी राशि का दुरुपयोग न हो। उन्होंने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को जल्द ही जिला कलेक्टर के समक्ष सीधे अपनी बात रखने और दस्तावेजों को पेश करने का समय भी तय करवाया।
आगामी खरीफ सीजन पर संकट; किसानों ने दी बड़ी चेतावनी
इस पूरे विवाद के बीच किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नए खरीफ सीजन की कृषि तैयारियां (जैसे बीज, खाद की खरीदी और खेतों की जुताई) शुरू होने वाली हैं। ऐसे में अगर धान का पुराना भुगतान तुरंत जारी नहीं हुआ, तो वे अगली फसल की बोनी नहीं कर पाएंगे।
किसानों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस फर्जी लोन घोटाले का शीघ्र निपटारा कर उनके खातों से रोक नहीं हटाई गई, तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन, चक्काजाम और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल किसान इस उम्मीद में हैं कि शासन स्तर से उन्हें जल्द ही न्याय और उनकी रोकी गई राशि मिल सकेगी।

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