बाड़मेर: राजस्थान के भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में कथित तौर पर बिना अनुमति बनी मस्जिदों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बाड़मेर और बीकानेर सहित कई सीमावर्ती जिलों में स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है। हालांकि, तनाव के बीच इस क्षेत्र से सामाजिक सौहार्द की एक अनूठी तस्वीर भी सामने आई, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने 'सर्व धर्म शांति सभा' के बैनर तले एक साथ आकर शांति मार्च निकाला और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।

प्रक्रिया पर उठाए सवाल, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

विरोध प्रदर्शन कर रहे स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मस्जिदों के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई करने से पहले प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कानूनी नियमों का समुचित पालन नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से इस पूरी कार्रवाई पर फिर से विचार करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।

हाईकोर्ट में याचिका: '15 किमी के दायरे में हुई कार्रवाई'

इस पूरे विवाद को लेकर अब राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि बीते 18 से 20 जून के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले अलग-अलग गांवों में करीब 12 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए निर्माणों को ढहा दिया गया।

सरकार का रुख: 'राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि'

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस मामले पर अपना कड़ा रुख साफ किया है। सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई है कि यह पूरा मामला सीधे तौर पर 'राष्ट्रीय सुरक्षा' से जुड़ा हुआ है। सरकारी पक्ष के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे हुए बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह के स्थायी निर्माण कार्य के लिए कड़े नियम तय हैं, जिसके तहत प्रशासन से पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होता है। नियमों के उल्लंघन के आधार पर ही यह सुरक्षात्मक कार्रवाई की गई है।

7 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजरें

सीमावर्ती इलाकों में उपजे इस विवाद के बाद अब सभी पक्षों की नजरें देश की न्यायपालिका पर टिकी हैं। राजस्थान हाईकोर्ट इस मामले से जुड़ी याचिका पर कल, यानी 7 जुलाई को अहम सुनवाई करने जा रहा है। इस सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगा कि इस पूरे मामले में आगे की कानूनी स्थिति क्या होगी और अदालत इस पर क्या निर्देश जारी करती है।