जयपुर: राजस्थान में मौसम के मिजाज में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां पिछले कुछ दिनों की झमाझम के बाद अब मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रदेश में मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर हुई है, जिसके चलते आने वाले कुछ दिनों तक अधिकांश इलाकों में केवल हल्की से मध्यम दर्जे की बौछारें ही देखने को मिलेंगी। हालांकि, मौसम प्रेमियों और किसानों के लिए राहत की बात यह है कि 15 जुलाई के बाद मानसूनी सिस्टम दोबारा जोर पकड़ेगा। शनिवार को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, डीग, भरतपुर और धौलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ बारिश के आसार हैं, और इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

बीते चौबीस घंटों का वर्षा रिकॉर्ड

राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ हिस्सों में बादलों ने अच्छी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसमें चूरू जिला सबसे आगे रहा और वहां सर्वाधिक 25.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा झुंझुनूं के पिलानी में 10.1 मिलीमीटर और सीकर में 4 मिलीमीटर पानी बरसा। अलवर और श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में भी अच्छी वर्षा दर्ज की गई, जिससे स्थानीय निवासियों को पिछले कई दिनों से सता रही उमस और तेज गर्मी से खासी राहत मिली है। राजधानी जयपुर में शुक्रवार को दिनभर बादलों की आवाजाही का दौर चलता रहा जिससे पारा 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास थमा रहा, जबकि जोधपुर में ठंडी हवाओं और बादलों के डेरे के कारण दिन का तापमान सामान्य से पांच डिग्री तक नीचे आ गया। वहीं कोटा में बरसात न होने से उमस ने बेहाल किया, जबकि उदयपुर और अजमेर में केवल बादलों की गड़गड़ाहट ही सुनाई दी।

धीमी बारिश से खरीफ फसलों पर संकट

मानसून की इस कछुआ चाल ने अब राजस्थान के अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर चालू खरीफ सीजन की खेती-किसानी पर दिखने लगा है। कम बारिश के चलते राज्य के 24 जिलों में अब तक सामान्य के मुकाबले काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसके कारण 34 जिलों में खरीफ फसलों की बुआई का काम बेहद पिछड़ गया है। कृषि विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इस बार अब तक करीब 30 प्रतिशत कम जमीन पर फसलों की बुआई हो सकी है। यदि आगामी दिनों में जोरदार मानसूनी बारिश नहीं होती है, तो किसानों को फसलों के अंकुरण और सिंचाई के संकट से जूझना पड़ सकता है।

मरुधरा के इलाकों में बढ़ा पारा

एक तरफ जहां कुछ इलाकों में हल्की बौछारें गिर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में सूरज के तेवर फिर से तीखे होने लगे हैं, जिससे तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर पूरे प्रदेश में सबसे तपा और वहां का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही पर्यटन नगरी जैसलमेर और फलोदी में पारा 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बीकानेर में भी अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से दोपहर के समय तेज गर्मी का अहसास हुआ। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवाओं में नमी की कमी और धूप खिलने के कारण ही पश्चिमी जिलों में यह गर्माहट लौट आई है।

आगामी दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभागों में 16 जुलाई तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम स्तर की बारिश का दौर रुक-रुक कर जारी रहने की उम्मीद है। इसी तरह बीकानेर संभाग के जिलों के साथ-साथ सिरोही, उदयपुर, झालावाड़ और बारां में भी छिटपुट स्थानों पर पानी गिर सकता है। मौसम विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि अगले चार से पांच दिनों तक राज्य में भारी बारिश की गतिविधियां थमी रहेंगी, लेकिन 15 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के चलते एक नया मानसूनी सिस्टम सक्रिय होगा, जिससे पूरे प्रदेश में एक बार फिर से मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।