जानकारों ने बताई बारिश के बाद सड़कों पर जाम लगने की वजह?
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बारिश भले ही थम चुकी हो, लेकिन सड़कें अब भी वाहनों की कतारों से पटी हुई हैं। नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम के बीच का सफर करने वाले लोग भीषण जाम से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जो रास्ता महज 20 मिनट का था, उसे तय करने में एक घंटे से भी ज्यादा का समय लग रहा है। हर बार बारिश के मौसम में दिल्ली-एनसीआर का यही हाल होता है। ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक का भारी दबाव पहले से ही है, लेकिन लगातार बारिश होने की वजह से सड़कों की वास्तविक क्षमता (कैपेसिटी) काफी घट जाती है।
अमेरिका की ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च बोर्ड द्वारा प्रकाशित हाईवे कैपेसिटी मैनुअल के अनुसार, ट्रैफिक इंजीनियर सड़क को एक पाइप की तरह देखते हैं, जिसमें पानी की जगह गाड़ियां बहती हैं। इस बहाव को समझने के लिए तीन मुख्य पैमाने मापे जाते हैं– ट्रैफिक वॉल्यूम (निश्चित समय और दूरी में निकलने वाले वाहन), डेंसिटी (सड़क पर एक समय में मौजूद वाहनों की संख्या) और वाहनों की औसत स्पीड। जब सड़क पूरी तरह खाली होती है, तब डेंसिटी कम होती है और गाड़ियां अपनी अधिकतम फ्री-फ्लो स्पीड पर चलती हैं। लेकिन जैसे ही सड़क पर गाड़ियां बढ़ती हैं, डेंसिटी बढ़ने के कारण वाहन एक-दूसरे के बेहद करीब आ जाते हैं, जिससे उनकी औसत गति गिरने लगती है। एक समय ऐसा आता है जब गाड़ियों का यह फ्लो सड़क की अधिकतम कैपेसिटी पर पहुंच जाता है।
बारिश के दौरान सड़कों पर जलजमाव, गड्ढों और कम दृश्यता के कारण गाड़ियों की रफ्तार अचानक धीमी हो जाती है। जब स्पीड बहुत ज्यादा गिर जाती है, तो सड़कों पर डेंसिटी (वाहनों का घनत्व) तेजी से बढ़ने लगती है। कैपेसिटी से अधिक डेंसिटी होने के कारण गाड़ियों का फ्लो पूरी तरह टूट जाता है और सड़कें बड़े जाम में तब्दील हो जाती हैं। यही कारण है कि बारिश थमने के बाद भी सड़कों को सामान्य होने में घंटों का वक्त लग जाता है।

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