औद्योगिक गंदे पानी पर लगेगी लगाम, फरीदाबाद में तीन CETP से बदलेगी तस्वीर
फरीदाबाद:हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक शहर फरीदाबाद में फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक केमिकल युक्त पानी से अब कृषि भूमि और फसलों को स्थाई रूप से मुक्ति मिलने वाली है। औद्योगिक अपशिष्ट के कारण लगातार दूषित हो रही भूमि को बचाने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। विभाग द्वारा शहर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में तीन नए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित किए जाएंगे, जो कारखानों से निकलने वाले जहरीले और रसायन युक्त पानी को आधुनिक तकनीक से पूरी तरह उपचारित करेंगे।
आठ सौ करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होगा अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
इस महत्वाकांक्षी पर्यावरण अनुकूल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार और संबंधित विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। पूरी योजना की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसके तहत इस व्यापक प्रोजेक्ट को कुल 800 करोड़ रुपये की भारी-भरकम अनुमानित लागत से पूरा किया जाएगा। इस बजट का उपयोग न केवल उच्च क्षमता वाले अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण में किया जाएगा, बल्कि पूरे शहर के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को प्लांट तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा।
केमिकल युक्त पानी के लिए बिछेगी अलग पाइपलाइन, सीवरेज सिस्टम को मिलेगी राहत
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि औद्योगिक कचरे और केमिकल युक्त पानी की निकासी के लिए पूरे शहर में बिल्कुल अलग से एक विशेष पाइपलाइन नेटवर्क डाला जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, फैक्ट्रियों का रसायन युक्त पानी भी सामान्य सीवरेज लाइनों के माध्यम से ही प्रवाहित होता है, जो आगे चलकर सामान्य सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंच जाता है। इस नए प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद औद्योगिक और घरेलू पानी का मिश्रण पूरी तरह रुक जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी एक नया आयाम मिलेगा।
सामान्य सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कार्यक्षमता में सुधार और तकनीकी खराबी से बचाव
मौजूदा समय में अलग व्यवस्था न होने के कारण फैक्ट्रियों का तेजाबी और केमिकल युक्त पानी घरेलू सीवरेज के साथ मिलकर सामान्य एसटीपी में पहुंच जाता है। अत्यधिक ज्वलनशील और हानिकारक रसायनों के कारण इन प्लांटों की संवेदनशील मशीनरी और फिल्टरिंग सिस्टम बार-बार पूरी तरह खराब हो जाते हैं, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान होता है और जल शोधन की प्रक्रिया भी बाधित होती है। नई तकनीक और सीईटीपी की स्थापना से जहां एक तरफ सरकारी मशीनरी की उम्र बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ उपचारित पानी का उपयोग उद्योगों और बागवानी में दोबारा किया जा सकेगा।

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