रोबोट क्रांति में चीन की बड़ी छलांग, भारत में ऑटोमेशन की रफ्तार अब भी धीमी
बीजिंग। वर्तमान वैज्ञानिक युग में स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पूरी दुनिया के कामकाजी तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। कारखाने, माल गोदाम, चिकित्सालय, होटल और कृषि फार्म जैसी जगहों पर अब मानव श्रम की जगह तेजी से आधुनिक मशीनें लेती जा रही हैं। पूर्व में जहां इन स्वचालित प्रणालियों का उपयोग केवल मोबाइल और वाहन निर्माता कंपनियों तक ही सीमित माना जाता था, वहीं अब पार्सल पहुंचाने, साफ-सफाई करने, होटल प्रबंधन संभालने और घरेलू कामकाज निपटाने में भी इनका धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर औद्योगिक रोबोटिक्स की मांग में अभूतपूर्व उछाल
वैश्विक रोबोटिक्स उद्योग की नवीनतम रिपोर्ट के आंकड़े गवाही देते हैं कि दुनिया भर के विनिर्माण क्षेत्र में स्वचालन को अपनाने की होड़ मची हुई है। बीते एक वर्ष के भीतर वैश्विक स्तर पर विभिन्न उद्योगों में रिकॉर्ड 5.55 लाख नए औद्योगिक रोबोट स्थापित किए गए हैं। यह प्रवृत्ति साफ दर्शाती है कि उत्पादन की गुणवत्ता और गति को सुधारने के लिए पूरी दुनिया की कंपनियां अब पूरी तरह से मशीनीकृत कार्यप्रणाली पर निर्भर होती जा रही हैं।
स्वचालन की दौड़ में महाशक्ति बनकर उभरा पड़ोसी देश चीन
औद्योगिक स्वचालन की इस वैश्विक दौड़ में चीन अन्य विकसित देशों को कोसों पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर काबिज हो गया है। चीनी उद्योगों ने अपनी उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए अकेले ही लगभग 2.95 लाख नए रोबोट अपने कार्यस्थलों पर तैनात किए हैं। चीन में इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के तीव्र विस्तार, बढ़ती हुई मानव मजदूरी दरों और सरकार की ओर से मिलने वाली विशेष रियायतों ने इस तकनीकी बदलाव की रफ्तार को अत्यधिक तेज कर दिया है।
भारतीय बाजार में रोबोटिक्स तकनीक के विस्तार की वर्तमान रफ्तार
महाशक्ति चीन की तुलना में भारत में रोबोटिक्स तकनीक को अपनाने की गति अभी काफी धीमी बनी हुई है और पिछले वर्ष देश के विभिन्न उद्योगों में केवल 9,100 नए रोबोट लगाए गए हैं। इस संख्या के साथ भारत वैश्विक स्तर पर रोबोट तैनाती के मामले में छठे स्थान पर बना हुआ है। वर्तमान में भारत के भीतर रोबोटिक तकनीक का मुख्य उपयोग केवल वाहन निर्माता उद्योग तक ही सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसका विस्तार होना अभी शेष है।
भविष्य के कामकाजी स्वरूप और मानव कौशल विकास की नई चुनौतियां
कार्यस्थलों पर मशीनों के इस बढ़ते हस्तक्षेप ने भविष्य के कामकाजी ढांचे और मानव रोजगार के स्वरूप को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे रोबोट इंसानी श्रम का स्थान लेंगे, वैसे-वैसे पारंपरिक नौकरियों में बदलाव आएगा और युवाओं को अधिक तकनीकी रूप से कुशल होना पड़ेगा। आने वाले समय में केवल वही कार्यबल प्रासंगिक रह पाएगा जो इन आधुनिक मशीनों को संचालित करने और उनके साथ मिलकर काम करने में सक्षम होगा।

आलिया भट्ट, माधवन समेत कई सेलेब्स आए छात्रों के समर्थन में, सोशल मीडिया पर रखी राय
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की तारीख तय, 9 जून से इस ऐतिहासिक मैदान पर होगा मुकाबला
यूथ टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया का जलवा, श्रीलंका पर 211 रन की ऐतिहासिक जीत
CJP प्रोटेस्ट पर सियासत तेज, ओवैसी बोले- क्या प्रदर्शन करना अब खतरा माना जाएगा?
संवाद बनाम आंदोलन, CJP प्रदर्शन पर सरकार ने चार बार दिया बातचीत का प्रस्ताव
NEET मुद्दे पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, केंद्र पर पारदर्शिता नहीं बरतने का दावा
दिल्ली के CP में शाम 6:30 बजे तक सब कुछ बंद, अचानक आदेश के पीछे क्या है वजह?
AI के दौर में ब्रश से बगावत, जंतर-मंतर पर छात्रों की रचनात्मक मुहिम चर्चा में
फास्ट-ट्रैक कोर्ट से मिलेगा जल्द न्याय, अमित शाह ने PM मोदी के फैसले को बताया अहम