ऑटो चालकों और आम लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एलपीजी संकट अब लोगों के सब्र की परीक्षा लेने लगा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शहर के कई गैस पंपों पर वाहनों की कतारें किलोमीटर तक फैल गई हैं. खासतौर पर ऑटो रिक्शा चालकों की मुश्किलें चरम पर हैं, जिन्हें गैस भरवाने के लिए घंटों लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है. रसोई और कमर्शियल गैस की सप्लाई पर आया संकट कुछ कम जरूर हुआ है लेकिन एलपीजी से चलने वाले वाहनों की मुसीबतें फिलहाल खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर में एक पंप पर खड़े थे हजार ऑटो
जयपुर शहर के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके का ताजा नजारा इस समस्या की गंभीरता को साफ बयां करता है. यहां एक एलपीजी पंप पर आज भी वाहनों की करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन देखी जा रही है जो दो अलग-अलग दिशाओं में फैली हुई है. एक ही पंप पर करीब एक हजार ऑटो रिक्शा कतार में खड़े नजर आए. यह स्थिति न सिर्फ अव्यवस्था को दर्शाती है बल्कि सप्लाई सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
6 से 8 घंटे इंतजार, फिर भी खाली हाथ लौटना पड़ता है
ऑटो चालकों का कहना है कि उनका आधे से ज्यादा दिन सिर्फ गैस भरवाने की जद्दोजहद में निकल जाता है. 6 से 8 घंटे तक इंतजार करने के बावजूद कई बार गैस नहीं मिल पाती और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. ऐसे में उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है क्योंकि सड़कों पर कम समय देने से आमदनी भी घट रही है. ऑटो चालकों का कहना है कि पिछले एक महीने से कमाई घटकर आधी से भी कम रह गई है और इस बार तो किश्त देने तक के पैसे नहीं हैं।
40 फीसदी बढ़ोतरी ने तोड़ी कमर -घेराव की चेतावनी
हालात को और बिगाड़ने वाली बात यह है कि कई पंप संचालकों ने गैस की सप्लाई सीमित कर दी है. इसके साथ ही एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने ऑटो चालकों की कमर तोड़ दी है. वाहनों को दी जाने वाली एलपीजी के दाम में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. महीने भर पहले 52 रुपये में मिलने वाली एलपीजी आज 73 रुपये में मिल रही है। एक तरफ लंबी लाइनें और अनिश्चितता तो दूसरी तरफ महंगी गैस, इस दोहरी मार ने हालात को और मुश्किल बना दिया है. गुस्साए और परेशान ऑटो चालकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे. अब सवाल यह है कि प्रशासन इस बढ़ते संकट पर कब तक ठोस कदम उठाएगा।

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