केजरीवाल का सियासी बम: पंजाब चुनाव के बाद मोदी सरकार नहीं टिकेगी
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की सियासी जमीन से केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़े संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। केजरीवाल ने एक साहसिक भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित होंगे और यहीं से भाजपा के 'विजय रथ' पर विराम लगेगा। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए भाजपा की चुनावी मशीनरी की तुलना अश्वमेध घोड़े से की और दावा किया कि पंजाब की जनता इस घोड़े को रोककर देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत करेगी।
लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग और चुनावी शुचिता पर सवाल
केजरीवाल ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल चुनाव जीतने के लिए केवल जनता के मतों पर नहीं, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों और धन-बल पर निर्भर है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि वहां की जीत लोकतंत्र की जीत नहीं बल्कि सत्ता का एक सुनियोजित खेल था, जिसे पूरे देश ने देखा है। उनके अनुसार, भाजपा अब विपक्ष को हराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता खतरे में पड़ गई है।
पंजाब में सत्ता समर्थक लहर और दलबदल की चुनौती
पंजाब सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि राज्य में उनकी सरकार के खिलाफ कोई असंतोष नहीं है, बल्कि लोग 'आप' की नीतियों के समर्थन में एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सरकारों के खिलाफ कुछ वर्षों बाद नाराजगी दिखने लगती है, लेकिन पंजाब के ग्रामीण इलाकों में आज भी उनकी सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बना हुआ है। हालांकि, पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने गहरा दुख जताया और इसे राज्य की जनता के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब के लोग बाहरी खतरों की तरह ही घर के भीतर छिपे गद्दारों को भी सबक सिखाने का माद्दा रखते हैं।
भविष्य की सियासी जंग और कानूनी मोर्चे पर घेराबंदी
इस राजनीतिक तकरार के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी मोर्चा संभाल लिया है और दल बदलने वाले सांसदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की जीत से उत्साहित भाजपा नेतृत्व पंजाब को फतह करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है और वह 2027 में भी बंगाल जैसा परिणाम दोहराने की उम्मीद लगाए बैठा है। केजरीवाल के इन तीखे हमलों ने न केवल आगामी चुनावों के लिए एजेंडा सेट कर दिया है, बल्कि पंजाब की राजनीति में एक नए और कड़े मुकाबले की आधारशिला भी रख दी है।

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