ओमप्रकाश सकलेचा के सामने विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा कर्मियों को करना पड़ा हस्तक्षेप
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले की जावद विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा को रविवार (21 जून) को अपने ही क्षेत्र में जनता के भारी जनाक्रोश का सामना करना पड़ा। एक शासकीय कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व मंत्री को ग्रामीणों ने चारों तरफ से घेरकर उनके खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि बात तीखी नोकझोंक और अपशब्दों तक पहुंच गई, जिसके बाद ग्रामीणों और विधायक के सुरक्षाकर्मियों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। विरोध की तीव्रता को देखते हुए विधायक को कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर बिना भूमिपूजन किए वापस लौटना पड़ा।
क्या है पूरा मामला? बुनियादी मांग के आगे विकास के दावे फेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीजेपी विधायक ओमप्रकाश सकलेचा अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बांगरेड़ में एक नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के आधिकारिक भूमिपूजन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने पहुंचे थे। जैसे ही वे कार्यक्रम स्थल पर आए, ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया।
ग्रामीणों के इस भारी विरोध की मुख्य वजह गांव में लंबे समय से पक्की सड़क का निर्माण न होना है। आक्रोशित ग्रामीणों का तार्किक रूप से कहना था कि गांव में बड़े स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तो स्वागत योग्य है, लेकिन जब अस्पताल तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क ही कीचड़ और पत्थरों से भरी कच्ची है, तो आपातकालीन स्थिति में मरीज और एम्बुलेंस वहां तक कैसे पहुंच पाएंगे? जनता का साफ कहना था कि अस्पताल से पहले सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
मंच पर शुरू हुआ हंगामा, कार तक पहुंचे आक्रोशित लोग
घटनाक्रम के अनुसार, पूर्व मंत्री जैसे ही मंच पर आसीन हुए और उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का ब्योरा देना शुरू किया, वैसे ही ग्रामीणों ने पक्की सड़क का मुद्दा उठाकर हंगामा शुरू कर दिया। माहौल को बिगड़ता और विरोध को बढ़ता देख बीजेपी विधायक ने मंच से उतरकर वहां से जाना ही बेहतर समझा।
जैसे ही वे अपनी गाड़ी की ओर बढ़े, देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीणों ने उनकी कार को घेर लिया और वहां तीखी नारेबाजी शुरू हो गई। विधायक सकलेचा ने वाहन के पास खड़े होकर लोगों को शांत कराने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित जनता पर उनके आश्वासनों का कोई असर नहीं हुआ। इस हंगामे के बीच भीड़ में से कुछ लोगों ने 'चोर-चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति को अनियंत्रित होता देख जब सुरक्षाकर्मियों ने घेरा बनाकर विधायक को कार में बैठाने की कोशिश की, तो ग्रामीणों और कमांडो/सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी हाथापाई और धक्का-मुक्की हो गई।
बिना भूमिपूजन के लौटे विधायक, साल भर पहले भी हुआ था विरोध
इस अप्रत्याशित और हिंसक विरोध के चलते पूर्व मंत्री बिना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आधारशिला रखे (भूमिपूजन किए) ही बेहद तनावपूर्ण माहौल के बीच वहां से रवाना हो गए। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं है; करीब एक वर्ष पूर्व भी जब वे इस चुनावी क्षेत्र के दौरे पर आए थे, तब भी उन्हें बुनियादी जनसुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा था।
फिलहाल, इस पूरी घटना का लाइव वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि वे कई वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पक्की सड़क की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिलते हैं, जिससे तंग आकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

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