राजस्थान में थमेगी बारिश की रफ्तार, मौसम विभाग ने दिया नया अपडेट
जयपुर। राजस्थान में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां मानसूनी फुहारों का इंतजार अब और अधिक लंबा हो सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति प्रदेश में फिलहाल काफी कमजोर पड़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी या संतोषजनक बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं है, जिससे आम जनता को अभी कुछ और दिन तीखी धूप का सामना करना पड़ेगा।
बंगाल की खाड़ी में नई मौसम प्रणाली बनने के बाद सक्रिय होगा मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में राजस्थान के वायुमंडल में मानसूनी हवाओं का प्रवाह काफी धीमा है और ऊपरी हवा में कोई भी मजबूत चक्रवाती तंत्र सक्रिय नहीं है। इसी वजह से मानसून के पूरे प्रदेश में पहुंचने के बाद भी वर्षा की गतिविधियां अचानक से पूरी तरह थम गई हैं, जिसे मौसम की भाषा में मानसून का "ब्रेक फेज" कहा जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि 20 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) विकसित हो सकता है, जिसके सक्रिय होकर आगे बढ़ने के बाद ही मरुधरा में झमाझम बारिश का दौर दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
तेज उमस के बीच कुछ जिलों में हल्की बूंदाबांदी और धूलभरी हवाओं का अलर्ट
आगामी पांच से सात दिनों के दौरान पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा, जिससे दिन के समय तेज धूप और उमस लोगों की मुश्किलें बढ़ाएगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस शुष्क दौर के बीच बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के कुछ सीमित इलाकों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है, जबकि 16 और 17 जुलाई को उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने पश्चिमी हिस्से के जोधपुर और बीकानेर संभाग में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली धूलभरी तेज हवाओं को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है।
फलोदी में पारा 41 डिग्री के पार और फसलों को बचाने के लिए नई उम्मीद
बारिश पर अचानक ब्रेक लगने की वजह से पूरे प्रदेश के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके चलते पिछले 24 घंटों के दौरान फलोदी 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया। मानसून के इस तरह कमजोर पड़ने से खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि इस समय फसलों को पानी की सख्त जरूरत है। कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग को पूरी उम्मीद है कि 20 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी से उठने वाला नया सिस्टम यदि मजबूत होकर राजस्थान की सीमा में प्रवेश करता है, तो यह फसलों के लिए संजीवनी साबित होगा और आम जनता को भी उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दिलाएगा।

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