सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से खुला मामला
जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे शाहगढ़ क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कैरेकल का शव मारने के बाद जलाने की भी कोशिश की थी।
घटना का वीडियो वायरल
जानकारी के अनुसार, 14 मार्च को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें कुछ लोग मृत कैरेकल के पास खड़े नजर आए। वीडियो में कैरेकल का शव लकड़ियों के ढेर के पास पड़ा था और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे जलाने की कोशिश की जा रही थी। वीडियो वायरल होते ही वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
रेंज सम के क्षेत्रीय वन अधिकारी लक्ष्मण सिंह के नेतृत्व में वन विभाग ने दो अलग-अलग टीमों का गठन किया। टीमों ने शाहगढ़ क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया और वीडियो में नजर आ रहे संदिग्धों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
वन विभाग के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी हैं, इब्राहिम खान, उमा, सलिदाद । ये सभी शाहगढ़ क्षेत्र के निवासी हैं। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर रेतीले टीलों में तलाश की गई, जहां से कैरेकल का आधा जला हुआ शव बरामद हुआ। घटनास्थल से एक ट्रैक्टर भी जब्त किया गया है, जिसका उपयोग शव को ले जाने में किया गया था।
आरोपियों का दावा और जांच
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि जंगली जानवर उनके मवेशियों के लिए खतरा बन गया था। उन्होंने कहा कि कैरेकल ने लगभग 50 मवेशियों को मार डाला था। आरोपियों के अनुसार, जब उन्होंने उसका पीछा किया तो वह भागते-भागते मर गई। हालांकि, वन विभाग इस दावे की जांच कर रहा है और वास्तविक कारण जानने के लिए वैज्ञानिक जांच करवाई जा रही है।
कानूनी कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम
जैसलमेर के वन मंडल अधिकारी (DFO) कुमार शुभम ने बताया कि इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद कैरेकल के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और आवश्यक सैंपल एकत्रित कर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून भेजे गए हैं।
कैरेकल है दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजाति
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कैरेकल भारत में बेहद दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजाति है। यह मुख्य रूप से शुष्क और रेतीले इलाकों में पाया जाता है। राजस्थान के पश्चिमी जिलों, खासकर जैसलमेर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी संख्या बहुत कम है। इस तरह की घटनाएं वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणवादियों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण से जुड़े लोगों में रोष देखा गया। उनका कहना है कि दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है। यदि घटना से जुड़े अन्य लोग सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी और गश्त को और मजबूत किया जाएगा।

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