बांसवाड़ा। स्थानीय महात्मा गांधी अस्पताल में प्रसव के कुछ ही समय बाद दो प्रसूताओं की असामयिक मृत्यु से जिले के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। इन दोनों युवा महिलाओं ने पहली बार मां बनने का सुख प्राप्त किया था, लेकिन प्रसव के चौबीस घंटे बीतने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दोहरी त्रासदी के बाद अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सा विशेषज्ञों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए एक उच्च स्तरीय कदम उठाया है।

दो माताओं की असमय मृत्यु से चिकित्सा जगत में मची सनसनी

अस्पताल से प्राप्त विवरण के अनुसार, सवनिया की रहने वाली इक्कीस वर्षीय लक्ष्मी और कानेला की बत्तीस वर्षीय लीला को प्रसव पीड़ा के बाद यहां भर्ती कराया गया था। दोनों ही प्रसूताओं ने सफलतापूर्वक बच्चों को जन्म दिया, परंतु प्रसव के बाद अचानक उत्पन्न हुई जटिलताओं के कारण दोनों की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। चिकित्सकों के अथक प्रयासों और आपातकालीन उपचार के बावजूद महज दो घंटे के भीतर दोनों माताओं की सांसें थम गईं, जिससे दोनों परिवारों में खुशी का माहौल मातम में बदल गया।

अत्यधिक रक्तअल्पता और उच्च रक्तचाप बने जानलेवा कारण

शुरुआती चिकित्सकीय रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मी नामक प्रसूता का हीमोग्लोबिन स्तर प्रसव से पहले सात ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी बेहद कम पाया गया था, जो गंभीर एनीमिया की श्रेणी में आता है। उसे ऑपरेशन से ठीक पहले रक्त भी चढ़ाया गया, लेकिन बाद में उसका ऑक्सीजन स्तर और रक्तचाप तेजी से गिरने लगा, हालांकि उसकी नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। वहीं दूसरी प्रसूता लीला को पहले गढ़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर कर यहां लाया गया था, जिसकी मृत्यु की मुख्य वजह गर्भावस्था के दौरान अचानक बढ़ा हुआ तीव्र उच्च रक्तचाप माना जा रहा है और उसका नवजात बेटा इस समय वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है।

मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए पांच सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी गठित

इस गंभीर घटनाक्रम को संज्ञान में लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योगेश काचा ने मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए पांच वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष चिकित्सकीय समिति का गठन किया गया है, जो इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं और दवाओं के रिकॉर्ड की स्क्रूटनी करेगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने प्रसूताओं को बचाने की हर संभव कोशिश की थी, और अब इस विस्तृत आंतरिक जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही मौतों के वास्तविक और सटीक तकनीकी कारणों का खुलासा हो सकेगा।

रेफरल मामलों की जटिलताओं और स्वास्थ्य ढांचे पर विशेषज्ञों का तर्क

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों का इस पूरे मामले पर तर्क है कि जिला स्तरीय बड़े अस्पतालों में अधिकांश मरीज ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से बेहद नाजुक और गंभीर स्थिति में रेफर होकर पहुंचते हैं। प्रसूति विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर एनीमिया, प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन और पल्मोनरी एंबोलिज्म जैसी अचानक उभरने वाली जटिलताएं कई बार जानलेवा साबित होती हैं। बहरहाल, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्तर पर प्रसव पूर्व देखभाल, आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन और एम्बुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा करने की आवश्यकता को अपरिहार्य बना दिया है।